छत्तीसगढ़

महाराष्ट्र ‘शहरी माओवादी’ गतिविधियों का केंद्र बना: सरकार ने विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम पर कहा

मुंबई, 7 अक्टूबर। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि राज्य शहरी माओवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया है और देश में ऐसे सबसे अधिक 64 सक्रिय संगठन यहीं काम कर रहे हैं जिसके मद्देनजर महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम लाया गया।

राज्य सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में मंगलवार को दाखिल एक हलफनामे में कहा कि यह कानून गैरकानूनी, विध्वंसक और चरमपंथी गतिविधियों को रोकने एवं उनसे निपटने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया गया।

यह हलफनामा महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (एमएसपीएसए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया।

हलफनामे में कहा गया कि राज्यभर में शहरी माओवादी नेटवर्क की बढ़ती मौजूदगी के कारण गैरकानूनी और विध्वंसक गतिविधियों से निपटने के लिए एक विशेष कानूनी ढांचे की जरूरत पड़ी।

इसके अनुसार, महाराष्ट्र शहरी माओवादी गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभरा है।

सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य में सक्रिय 64 प्रमुख संगठन काम कर रहे हैं और यह पूरे देश में सक्रिय इन संगठनों की सबसे अधिक संख्या हैं।

हलफनामे में कहा गया, यह कानून मौलिक स्वतंत्रताओं और सार्वजनिक व्यवस्था एवं राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करने के राज्य के दायित्व के बीच संतुलन कायम करने का प्रयास करता है।

ये याचिकाएं कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दाखिल की हैं।

मुख्य न्यायाधीश एम. सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को सरकार के हलफनामे पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समय दिया।

सरकार ने उच्च न्यायालय से याचिकाएं खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को कोई प्रत्यक्ष कानूनी क्षति नहीं हुई है।

यह कानून राज्य विधानसभा ने पिछले साल जुलाई में पारित किया था और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिसंबर में इसे मंजूरी दी थी। एमएसपीएसए का उद्देश्य वामपंथी उग्रवादी संगठनों या इसी तरह के निकायों की गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना है।

कानून में चार ऐसे अपराधों का प्रावधान किया गया है, जिनके लिए किसी व्यक्ति को सजा दी जा सकती है। इनमें किसी गैरकानूनी संगठन की सदस्यता रखना, सदस्य नहीं होते हुए ऐसे संगठन के लिए धन जुटाना, उसके प्रबंधन में सहायता करना या कोई गैरकानूनी गतिविधि करना शामिल है।

यह कानून राज्य सरकार को किसी संदिग्ध संगठन को गैरकानूनी संगठन घोषित करने का अधिकार देता है।

याचिकाओं में दावा किया गया है कि यह कानून कार्यपालिका को गैरकानूनी गतिविधि एवं गैरकानूनी संगठन की अस्पष्ट और अत्यधिक व्यापक परिभाषाओं के आधार पर संगठनों पर प्रतिबंध लगाने तथा उनकी संपत्तियां कुर्क करने का व्यापक, मनमाना और अत्यधिक अधिकार प्रदान करता है।(भाषा)

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