बिहार: 5 करोड़ से अधिक के टेंडरों की जांच होगी, स्वास्थ्य और नगर विकास समेत 9 विभाग शामिल

बिहार सरकार ने जनवरी 2026 से अब तक जारी हुए 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि वाले सरकारी टेंडरों की तकनीकी जांच कराने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने संबंधित विभागों से इन टेंडरों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
जांच का दायरा नौ विभागों तक रखा गया है। इनमें स्वास्थ्य विभाग (मंत्री निशांत कुमार), नगर विकास एवं आवास विभाग (मंत्री नीतीश मिश्रा), पथ निर्माण, पर्यटन, ग्रामीण कार्य, ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण (पीएचईडी), भवन निर्माण और लघु जल संसाधन विभाग शामिल हैं।
जांच में क्या देखा जाएगा
सरकार की इस प्रक्रिया में सिर्फ टेंडर की राशि ही नहीं देखी जाएगी। पूरी निविदा प्रक्रिया, उससे जुड़े दस्तावेज और अंतिम परिणाम की भी पड़ताल की जाएगी। यह देखा जाएगा कि प्रक्रिया में छेड़छाड़ तो नहीं हुई, नियमों से हटकर कोई फैसला तो नहीं लिया गया या कोई अन्य अनियमितता सामने आती है या नहीं।
विभागों से हर टेंडर का पूरा ब्योरा मांगा गया है। इसमें टेंडर जारी करने की तारीख, संबंधित काम का नाम, विभाग द्वारा तय अनुमानित राशि, टेंडर की मौजूदा स्थिति और अनुमानित लागत व अंतिम परिणाम के बीच का अंतर (प्रतिशत में) शामिल है।
जांच कौन करेगा
इन टेंडरों की तकनीकी जांच निगरानी विभाग के टेक्निकल एक्जामिनर सेल के जरिए कराई जाएगी। इस सेल में तकनीकी जानकारी रखने वाले इंजीनियर तैनात हैं। टीम दस्तावेजों, प्रक्रिया और परिणाम का अध्ययन कर यह तय करेगी कि काम तय नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
सरकार ने संबंधित विभागों से जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। रिकॉर्ड मिलने के बाद टेक्निकल एक्जामिनर सेल जांच शुरू करेगा। इस कदम का मकसद बड़ी परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और संभावित गड़बड़ी की पहचान करना बताया जा रहा है।



