छत्तीसगढ़

राजनीतिक आंदोलन के 9 प्रकरण वापस लेने की अनुशंसा, विजय शर्मा की अध्यक्षता में समिति की बैठक

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े प्रकरणों की वापसी के संबंध में गठित समिति की बैठक मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में हुई। बैठक की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री एवं गृह तथा जेल मंत्री विजय शर्मा ने की।

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और कृषि मंत्री राम विचार नेताम शामिल हुए। अधिकारियों में प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारीक, प्रमुख सचिव विधि मनीष ठाकुर, गृह सचिव नेहा चंपावत और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के साथ गृह, विधि एवं पुलिस विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

समिति के समक्ष प्रदेश के विभिन्न जिलों में राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े कुल 16 प्रकरण रखे गए। इनमें 8 पहले से लंबित प्रकरण भी शामिल थे। प्रकरणवार समीक्षा के बाद समिति ने 9 प्रकरणों को वापसी योग्य मानते हुए अनुशंसा की। दो प्रकरण पुनर्विचार के लिए संबंधित जिलों को वापस भेज दिए गए। शेष प्रकरण राजनीतिक आंदोलन से जुड़े नहीं पाए जाने पर अस्वीकृत कर दिए गए।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अधिकारियों से पूर्व में अनुशंसित लंबित प्रकरणों की वर्तमान स्थिति और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने न्यायालय में लंबित प्रकरणों को त्वरित गति से आगे बढ़ाने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े मामलों में आवश्यक प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी ढंग से पूरी की जाए। सरकार का उद्देश्य राजनीतिक कारणों से दर्ज सामान्य प्रकरणों में राहत देना है, गंभीर आपराधिक मामले इसमें शामिल नहीं किए जाएंगे।

राज्य सरकार ने राजनीतिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा के लिए यह मंत्रिमंडलीय समिति गठित की है। समिति जिला स्तर से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण कर तय करती है कि कौन से मामले राजनीतिक आंदोलन से संबंधित हैं और उन्हें वापस लिया जा सकता है। पिछली बैठकों में भी कई मामलों में वापसी की अनुशंसा हो चुकी है।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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