शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की शराबखोरी ! अधिकारी की समझाइश बेअसर, आखिर कब होगी कार्रवाई?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड में कर्मचारियों द्वारा खुलेआम शराब पीने का मामला सामने आने से विभागीय अनुशासन और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारियों को समझाइश देने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विभागीय अधिकारियों की चेतावनी का असर क्यों नहीं हो रहा और अनुशासन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था आगे क्या कदम उठाएगी?शासकीय सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण और व्यवहार से विभाग की गरिमा बनाए रखें। विशेषकर शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल निर्धारित कार्यों के निर्वहन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके व्यवहार से विभाग की छवि भी प्रभावित होती है। ऐसे में यदि कर्मचारियों द्वारा खुलेआम शराब पीने की शिकायतें सामने आती हैं, तो यह मामला केवल व्यक्तिगत आचरण का नहीं, बल्कि विभागीय अनुशासन और जवाबदेही का भी बन जाता है।मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक की समझाइश के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने की बात कही जा रही है। यदि यह स्थिति लगातार बनी हुई है, तो विभागीय स्तर पर यह समीक्षा आवश्यक हो जाती है कि समझाइश का पालन क्यों नहीं हो रहा है और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित कर्मचारियों की पहचान, घटना का स्थान, समय और उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।सवाल यह भी है कि क्या केवल समझाइश देने से विभागीय अनुशासन कायम रह सकता है? यदि किसी कर्मचारी द्वारा शासकीय कार्यस्थल पर अथवा ड्यूटी के दौरान शराब पीने की पुष्टि होती है, तो संबंधित सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि घटना ड्यूटी के बाहर की है, तो उसके तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर ही विभाग को निर्णय लेना होगा।इस मामले में बीईओ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। विभागीय अनुशासन बनाए रखना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसलिए आवश्यक है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित पक्षों का बयान लिया जाए और तथ्यों की पुष्टि होने पर नियमानुसार उचित कदम उठाए जाएं। साथ ही, यदि पहले समझाइश दी गई थी, तो उसके बाद की स्थिति की भी समीक्षा होनी चाहिए।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिल्हा विकासखंड में सामने आए इस मामले को विभाग कितनी गंभीरता से लेता है। क्या जांच के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी, या मामला समझाइश तक ही सीमित रह जाएगा? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—जब समझाइश के बाद भी कथित रूप से स्थिति नहीं सुधर रही, तो विभागीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए अगला कदम क्या होगा?
