छत्तीसगढ़

पहली शादी छिपाने और दहेज प्रताड़ना के आरोप, अमेरिकी पति समेत छह के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 15 अक्टूबर। पहली शादी और तलाक की जानकारी छिपाने, दहेज के लिए प्रताड़ित करने तथा मारपीट के आरोपों से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति समेत छह लोगों को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि शिकायत में आरोपियों की भूमिका को लेकर विशिष्ट आरोप हैं और जांच अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में तथ्यों की विस्तृत जांच के बिना एफआईआर खत्म करने का आधार नहीं बनता।

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि इस स्तर पर वह मामले के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं दे रही है।

दुर्ग जिले के रिसाली-भिलाई की श्रद्धा मिश्रा ने शिकायत में बताया कि उनकी शादी अंकित रावत से 12 फरवरी 2024 को दुर्ग के पुलगांव स्थित अनंता ग्रीन में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी।

शिकायत के अनुसार, शादी से पहले अंकित को अविवाहित, आर्थिक रूप से संपन्न और अमेरिका के न्यू जर्सी में मकान का मालिक बताया गया था। बाद में पता चला कि उनकी पहले भी शादी हो चुकी थी और तलाक हो गया था।

श्रद्धा के परिवार ने शादी में करीब 10 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के जेवर और अन्य सामान दिया था। इसके बावजूद कम दहेज लाने के ताने देने और अतिरिक्त रकम की मांग करने का आरोप है।

शिकायत में कहा गया है कि अमेरिका में पति के साथ रहने के दौरान श्रद्धा को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आरोप है कि गर्भावस्था और बेटी के जन्म के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा।

28 अप्रैल 2026 को ससुर द्वारा नाबालिग बेटी को गोद में लेकर शराब पीने पर आपत्ति जताने के बाद विवाद और मारपीट होने का आरोप लगाया गया। इसके बाद श्रद्धा और उनकी बेटी को भारत भेज दिया गया। महिला की शिकायत पर दुर्ग महिला थाना पुलिस ने 18 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की।

आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि शादी अमेरिका के न्यू जर्सी में हुई थी और श्रद्धा को अंकित की पहली शादी तथा तलाक की जानकारी पहले से थी। यह भी कहा गया कि पति के कुछ रिश्तेदारों को बेवजह मामले में शामिल किया गया है।

राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि शिकायत में सभी आरोपियों की भूमिका, दहेज की मांग और प्रताड़ना का जिक्र है।

हाईकोर्ट ने कहा कि शादी कहां हुई और उससे जुड़े तथ्यों को लेकर विवाद है। केवल अमेरिकी विवाह प्रमाणपत्र पेश कर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। इन तथ्यों की विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर जांच जरूरी है।

बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जांच के शुरुआती चरण में आरोपों और साक्ष्यों का उसी तरह विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, जैसा ट्रायल के दौरान होता है। एफआईआर रद्द करने का आधार नहीं मिलने पर याचिका खारिज कर दी गई। अब पुलिस कानून के मुताबिक जांच आगे बढ़ाएगी।

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