छत्तीसगढ़

बस्तर दशहरा: दंतेश्वरी की छत्र – डोली की जगदलपुर विदाई

छत्तीसगढ़ संवाददाता
दंतेवाड़ा, 18 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां दंतेश्वरी की छत्र – डोली को दंतेवाड़ा से जगदलपुर के लिए रविवार को भावपूर्ण विदाई दी गई। विश्व के सर्वाधिक लंबे, 75 दिवसीय ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में शामिल मावली परघाव के लिए दंतेश्वरी देवी की डोली प्रतिवर्ष जगदलपुर जाती है।
मां दंतेश्वरी की डोली दंतेवाड़ा स्थित मंदिर से रवाना होने से पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस बल ने पहली सलामी दी। इसके बाद मंदिर समिति के व्यवस्थापकों एवं पुजारियों ने पारंपरिक पूजा कराई।

विदाई के दौरान पूरे नगर में भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे, मोहरी की गूंज, लोक नृत्य और जयकारों के बीच मां की डोली को भावभीनी विदाई दी।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह, मंदिर समिति के पदाधिकारी, पुजारीगण तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

नगर वासियों ने नम आंखों से दी विदाई
डोली का कारवां जैसे-जैसे बढ़ता गया, भक्तों की व्याकुलता बढ़ती गई। श्रद्धालुओं ने अपनी आराध्य देवी को नम आंखों से विदाई दी। इस दौरान वाद्य यंत्रों, मोहरी की मधुर धुनों और लोक नृत्य दलों की प्रस्तुति के बीच यात्रा जयस्तंभ चौक से होती हुई डंकनी नदी पुल तक पहुंची। यात्रा के साथ मंदिर के प्रधान पुजारी जिया बाबा, मांझी, चालकी, कुम्हार, राउत, समरथ तथा सेवादार परंपरागत रीति-रिवाजों का निर्वहन करते हुए पैदल चल रहे थे। हजारों श्रद्धालु पूरे मार्ग में जय मां दंतेश्वरी के जयकारों के साथ डोली के पीछे-पीछे चलते रहे।

आंवराभाटा में विशेष पूजा
टेम्पल कमेटी के अध्यक्ष देवेश कुमार ध्रुव ने आंवराभाटा स्थित माई जी के चबूतरे पर विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां दंतेश्वरी से जिले की सुख-समृद्धि और प्रगति का आशीर्वाद मांगा तथा डोली एवं छत्र को जगदलपुर के लिए रवाना किया। इसके पश्चात फूलों से सुसज्जित विशेष रथ में डोली एवं छत्र को जगदलपुर के लिए रवाना किया गया।
अंतिम पड़ाव में दंतेश्वरी देवी की डोली जगदलपुर स्थित जिया डेरा पहुंचेगी, जहां मावली परघाव की ऐतिहासिक रस्म संपन्न होगी।

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