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CWC बैठक में खरगे का थरूर पर तंज, गांधी जयंती कार्यक्रम में उपस्थिति की गारंटी मांगी

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद शशि थरूर के बीच हल्के-फुल्के लेकिन तीखे संवाद का जिक्र सामने आया है। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर विपक्षी रणनीति पर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार शशि थरूर ने सुझाव दिया कि कांग्रेस महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर के आसपास बड़ा कार्यक्रम आयोजित करे, ताकि भाजपा इस मौके का इस्तेमाल अपना नैरेटिव बनाने में न कर सके। यह सुझाव चुनाव आयोग और सीईसी के खिलाफ चल रहे विरोध के संदर्भ में दिया गया।

इस पर मल्लिकार्जुन खरगे ने थरूर से पूछा कि अगर पार्टी ऐसा कार्यक्रम आयोजित करती है तो क्या वे खुद उसमें मौजूद रहेंगे, या फिर उनकी राय सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और अखबारों के लेखों में ही दिखेगी। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार यह टिप्पणी हल्के अंदाज में की गई, लेकिन इसमें राजनीतिक संकेत भी था।

कांग्रेस के अंदर थरूर की भूमिका को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। वे अक्सर सार्वजनिक लेख और बयान देते हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व सड़क आंदोलन और संगठनात्मक उपस्थिति पर जोर देता रहा है। खरगे इससे पहले भी कुछ नेताओं पर टीवी चर्चाओं और लेखों तक सीमित रहने का इशारा कर चुके हैं।

इसी बैठक में कांग्रेस ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूची से कटे नामों की बहाली जैसी मांगें दोहराईं। इंडिया गठबंधन ने नवंबर में बड़ी रैली का भी संकेत दिया है। 2 से 8 अक्टूबर के बीच जिलों में सेव डेमोक्रेसी मार्च आयोजित करने की योजना भी बताई गई।

थरूर चुनाव आयोग के फैसलों पर पहले भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता और सार्वजनिक रिकॉर्ड की मांग की थी। पार्टी नेतृत्व का रुख सीईसी को सरकार के दबाव में काम करने वाला बताने का रहा है, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता आया है।

यह घटना कांग्रेस के अंदर रणनीति और नेताओं की भागीदारी को लेकर चल रही आंतरिक चर्चा को दर्शाती है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुट प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है, दूसरी तरफ पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति और सक्रियता को लेकर सवाल भी उठते रहते हैं।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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