तेलीबांधा चौक का नाम बदलना साहू समाज का अपमान : भागवत साहू
राजनांदगांव :- जिला साहू संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक भागवत साहू ने रायपुर के तेलीबांधा चौक का नाम बदले जाने की घोषणा पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे साहू समाज की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक भावनाओं का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि तेलीबांधा केवल एक चौक का नाम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही सामाजिक विरासत, इतिहास और समाज की पहचान का प्रतीक है। ऐसे में विकास के नाम पर इसकी पहचान बदलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
श्री साहू ने कहा कि भाजपा ने साहू समाज का अपमान किया है और वह साहू समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय समाज के सम्मान और हितों की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं लेकिन जब समाज की ऐतिहासिक पहचान और भावनाओं के संरक्षण की बात आती है तो उसे नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि तेलीबांधा नाम के साथ समाज की अनेक स्मृतियां, परंपराएं और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। यह नाम केवल किसी स्थान की पहचान नहीं, बल्कि तेली समाज की सामाजिक यात्रा और गौरवशाली विरासत का हिस्सा है। पीढ़ियों से इस नाम को समाज अपनी पहचान के रूप में देखता आया है। श्री साहू ने कहा कि समाज विकास का विरोधी नहीं है। शहर और प्रदेश का विकास होना चाहिए तथा नई सुविधाएं और नई व्यवस्थाएं भी विकसित होनी चाहिए लेकिन विकास के नाम पर किसी समाज की ऐतिहासिक पहचान और विरासत को मिटाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी नाम में उस स्थान का इतिहास और उससे जुड़ी सामाजिक भावनाएं समाहित होती हैं इसलिए ऐसे निर्णय लेते समय समाज की भावनाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं संबंधित प्रशासन से आग्रह किया कि समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए तेलीबांधा चौक नाम को यथावत रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी स्थान का नाम बदलना आसान हो सकता है लेकिन उससे जुड़ी ऐतिहासिक और सामाजिक भावनाओं को समाप्त नहीं किया जा सकता। श्री साहू ने कहा कि साहू समाज हमेशा सामाजिक समरसता, विकास और जनहित की बात करता आया है। समाज किसी भी सकारात्मक विकास कार्य का स्वागत करता है लेकिन ऐतिहासिक पहचान के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल किसी व्यक्ति या संगठन की नहीं बल्कि समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि तेलीबांधा की पहचान को कायम रखना समाज के इतिहास और सम्मान को सुरक्षित रखना है। प्रशासन को इस विषय पर समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी भावनाओं को समझना चाहिए और ऐसा कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए जिससे समाज में आक्रोश या असंतोष पैदा हो। श्री साहू ने दो टूक कहा कि नाम बदले नहीं, पहचान मिटे नहीं। तेलीबांधा की ऐतिहासिक पहचान कायम रहे यही समाज की मांग है।
