कोरबा में 12 घंटे जाम से हाहाकार, एनएचएआई पर पुलिस ने कोर्ट में डाला परिवाद, एजेंसी पर 10 लाख का जुर्माना

छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोरबा, 14अक्टूबर।कोरबा में नेशनल हाईवे-130पर ट्रेलर हादसे के बाद करीब12घंटे तक लगे जाम ने पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को आमने-सामने ला दिया है। राहत और ट्रैफिक बहाली में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस ने एनएचएआई अधिकारियों के खिलाफ कटघोरा कोर्ट में शिकायत की है। दूसरी ओर,अपनी जांच में लापरवाही सामने आने के बाद एनएचएआई ने संबंधित एजेंसी पर तत्काल10लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है।
हादसा12अक्टूबर की रात करीब2बजे बांगो-मोरगाथाना क्षेत्र के मदनपुर घाट अंतर्गत तारा घाटी के पास हुआ। यहां खराब होने के कारण एक ट्रेलर हाईवे पर खड़ा था। इसी दौरान तारा घाटी से कटघोरा की ओर जा रहा दूसरा ट्रेलर उससे पीछे से टकरा गया।
टक्कर के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। देखते ही देखते यातायात ठप हो गया और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी।
करीब12घंटे तक चले जाम में बसों के यात्री,एंबुलेंस में मरीज और ट्रेन व फ्लाइट पकड़ने के लिए निकले लोग फंसे रहे। महिलाओं और बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कटघोरा एसडीओपी विजय सिंह ठाकुर के मुताबिक,संबंधित विभाग के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई,लेकिन उनके मोबाइल बंद मिले। इससे जाम हटाने और राहत कार्यों में दिक्कत आई।
पुलिस का आरोप है कि एनएचएआई अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और सरकारी कर्मचारियों को उनके काम में जरूरी सहयोग नहीं दिया। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा222ए के तहत कटघोरा कोर्ट में शिकायत पेश की गई है।
पुलिस ने साफ किया है कि भविष्य में भी यदि कोई एजेंसी हादसे के दौरान राहत और यातायात बहाली में सहयोग नहीं करती है,तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर,एनएचएआई की जांच में भी हादसे के बाद व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आईं। जांच के अनुसार,चोटिया टोल प्लाजा के पास दुर्घटना के समय संबंधित एजेंसी मेसर्स रविंद्र सिंह का प्रोजेक्ट मैनेजर मौके पर मौजूद नहीं था। क्रेन ऑपरेटर भी उपलब्ध नहीं था और रिकवरी उपकरणों के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं था।
हाईवे हेल्पलाइन1033पर बार-बार सूचना देने के बावजूद समय पर सहायता नहीं पहुंची। एनएचएआई ने इसे हादसों के प्रबंधन और हाईवे पेट्रोलिंग के निर्धारित मानकों का उल्लंघन माना। इसके बाद संबंधित एजेंसी पर10लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
इस घटना के बाद पुलिस की शिकायत और एनएचएआई की कार्रवाई ने हाईवे पर हादसों के बाद राहत व्यवस्था की पोल खोल दी है।

