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छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स के लक्ष्य दो साल पहले पूरे करेगा छत्तीसगढ़

रायपुर, 1 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत नगरीय निकायों में ऋण वितरण, लंबित प्रकरणों के निपटान और पथ विक्रेताओं के शत-प्रतिशत डिजिटल सशक्तीकरण की रफ्तार तेज करने का फैसला किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में कहा गया कि भारत सरकार से मिले लक्ष्यों को निर्धारित समय-सीमा से दो वर्ष पहले पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

मंत्रालय में वर्चुअल माध्यम से हुई बैठक में बोरा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र पथ विक्रेता योजना के लाभ से वंचित न रहे। योजना का मूल उद्देश्य शहरी पथ विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के सुलभ कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने नगरीय निकायों और बैंक प्रतिनिधियों से आपसी समन्वय बढ़ाकर ऋण आवेदनों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

लक्ष्य समय से पहले पूरे करने की कार्ययोजना

प्रमुख सचिव ने सभी नगरीय निकायों को विशेष कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण के ऋण वितरण की निकायवार तथा बैंकवार समीक्षा की गई। लंबित आवेदनों के शीघ्र निपटान के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) को भी निर्देशित किया गया। बैठक में जोर दिया गया कि अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए निकायों और बैंकों के बीच तालमेल मजबूत किया जाए।

बोरा ने कहा कि बैंकों में लंबित ऋण प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए और पात्र पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ने पर पूरा ध्यान दिया जाए। राज्य शासन की मंशा है कि केंद्र द्वारा तय लक्ष्यों को समय-सीमा से पहले हासिल कर छत्तीसगढ़ को योजना क्रियान्वयन में अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाए।

डिजिटल लेन-देन और कैशबैक पर फोकस

बैठक में क्यूआर कोड वितरण, यूपीआई के माध्यम से डिजिटल लेन-देन और इस पर दिए जा रहे कैशबैक प्रोत्साहन की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने पथ विक्रेताओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। शत-प्रतिशत डिजिटल सशक्तीकरण को योजना का अहम हिस्सा बताया गया, ताकि विक्रेता नकद लेन-देन की निर्भरता कम कर औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ सकें।

पीएम स्वनिधि के तहत समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को ब्याज सब्सिडी और डिजिटल लेन-देन पर कैशबैक का लाभ मिलता है। पुनर्गठित योजना में पात्र विक्रेताओं को यूपीआई-लिंक्ड रूपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध है। बैठक में इन घटकों की प्रगति पर चर्चा हुई और जमीनी स्तर पर अमल तेज करने को कहा गया।

मानव संसाधन, क्रेडिट कार्ड और स्ट्रीट फूड हब

योजना को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने के लिए राज्य तथा निकाय स्तर पर मानव संसाधन की नियुक्ति को स्वीकृति दी गई। क्रेडिट कार्ड योजना की प्रगति, प्रदेश में स्वच्छ एवं हाइजीनिक स्ट्रीट फूड हब की स्थापना और ऋण अदायगी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। भारत सरकार को भेजे गए प्रस्तावों पर कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की गई।

बोरा ने नगरीय निकायों में पथ विक्रेताओं के साथ नियमित संवाद कार्यक्रम और जिला स्तर पर बैंकर्स कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। इन कार्यक्रमों के जरिए विक्रेताओं को योजना की पात्रता, ऋण प्रक्रिया और डिजिटल लेन-देन की जानकारी दी जाएगी तथा बैंकों से समन्वय कर लंबित प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों और बैंक शाखाओं को सम्मानित करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में मौजूद अधिकारी

राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग के उप सचिव ए.के. सिंह, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील अग्रहरि, भारतीय रिजर्व बैंक के उप महाप्रबंधक प्रदीप गोंदुले, सिडबी के उप महाप्रबंधक संतोष राव मोरे, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधि उप महाप्रबंधक मनोज सिंह, नगर निगमों के आयुक्त प्रकाश सर्वे, अरुण वर्मा, दशरथ सिंह राजपूत, उपायुक्त नीरज कौशिक, कार्यपालन अभियंता ए.के. सिंह तथा योजना के निकाय स्तरीय नोडल अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

पीएम स्वनिधि: योजना का संदर्भ

पीएम स्वनिधि को जून 2020 में कोविड काल में शहरी पथ विक्रेताओं को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की यह योजना बिना गारंटी सूक्ष्म ऋण, डिजिटल भुगतान अपनाने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ाव पर केंद्रित है। केंद्र सरकार ने योजना का पुनर्गठन कर ऋण अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई है और कुल परिव्यय बढ़ाया है। देशभर में लाखों पथ विक्रेता इससे लाभान्वित हो चुके हैं।

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय अब विशेष कार्ययोजना के तहत पात्र विक्रेताओं की पहचान, आवेदन प्रक्रिया सरल बनाने, बैंक स्तर पर लंबित मामलों के निपटान और डिजिटल ऑनबोर्डिंग पर जोर देंगे। राज्य स्तरीय निगरानी समिति की यह बैठक योजना के क्रियान्वयन को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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