21 दिन से हड़ताल पर पटवारियों के लिए ‘ब्रेक इन सर्विस’ आदेश से बढ़ा टकराव

आदेश की प्रतियां जलाईं,कई जिलों में प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 4नवंबर।छत्तीसगढ़ पटवारी संघ के बैनर तले प्रदेशभर के पटवारी13अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। तीन सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई इस हड़ताल को21 दिन से अधिक हो चुके हैं,लेकिन समाधान की कोई राह नहीं निकली है। दूसरी ओर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ढाई सौ से अधिक पटवारियों को नोटिस जारी कर दिया है कि हड़ताल की अवधि उनकी सेवा अवधि में नहीं जोड़ी जाएगी। इस आदेश ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।
पटवारी वेतनमान की विसंगतियां दूर करने,प्रमोशन के अवसर देने और पीएवी ऐप वापस लेने की मांग कर रहे हैं। हड़ताल का असर अब आम लोगों के राजस्व संबंधी कामों पर भी दिखने लगा है। जमीन की सीमांकन,नामांतरण और बंटवारे जैसी प्रक्रियाएं अटक गई हैं।
15नवंबर से धान खरीदी शुरू होनी है,लेकिन पटवारियों की आधिकारिक आईडी से सत्यापन के इंतजार में1,711खसरों की एंट्री अब तक लंबित है। ऐसे में खरीदी की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
हड़ताल की अवधि को सेवा से बाहर रखने यानी ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई के बाद पटवारियों का गुस्सा बढ़ गया है। बिलासपुर में आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध जताया गया। दूसरे जिलों में रैली और आम सभाओं के जरिए प्रदर्शन जारी है। मस्तूरी में पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं कोरबा में संघ के एक पदाधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
मस्तूरी के एसडीएम बजरंग वर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। इसमें स्पष्ट किया गया है कि हड़ताल में बिताए गए दिनों को उनकी सेवा अवधि में नहीं गिना जाएगा। फिलहाल इसके अलावा कोई दूसरी कार्रवाई नहीं की गई है।
छत्तीसगढ़ पटवारी संघ के अध्यक्ष भागवत कश्यप ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रदेश के सभी जिलों में पटवारियों के खिलाफ की गई ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई वापस नहीं ली जाती,तब तक बातचीत का सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है।



