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फलोदी के लोहावट क्षेत्र की तीन ढाणियों में पेयजल व्यवस्था सुदृढ़, 2,805 ग्रामीण लाभान्वित

जयपुर। फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर) में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत किए गए कार्यों के बाद स्थानीय पेयजल तंत्र में सुधार हुआ है। विभाग के अनुसार, इन कार्यों पर करीब 1.50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और योजना से 2,805 ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं।

इन तीनों ढाणियों में लंबे समय से पेयजल व्यवस्था टैंकर, सामूहिक स्रोत या अनियमित आपूर्ति पर निर्भर रही है। ग्रामीणों की जरूरत को देखते हुए उच्च जलाशयों के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और संबंधित कार्यों को पूरा किया गया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अनुसार, 15 जनवरी 2025 को कार्यादेश जारी होने के बाद प्रस्तावित कार्य पूरे किए गए।

क्या काम हुए

योजना के तहत तीन उच्च जलाशयों का निर्माण किया गया। इनके साथ पाइपलाइन संबंधी आवश्यक कार्य भी पूरे किए गए, ताकि भंडारण क्षमता बढ़े और पानी का वितरण अधिक व्यवस्थित हो सके। विभाग का दावा है कि इन कार्यों से स्थानीय पेयजल तंत्र को नया आधार मिला है।

सुथारों की ढाणी, डूडियो की ढाणी और पुनियों की ढाणी अलग-अलग बस्तियां हैं, लेकिन इनकी मूल समस्या एक ही थी- नियमित और पर्याप्त पेयजल आपूर्ति। अब इन क्षेत्रों में जलाशयों और पाइपलाइन के जरिए व्यवस्था को पहले की तुलना में मजबूत बताया जा रहा है।

लाभ और संदर्भ

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस योजना से कुल 2,805 ग्रामीण जुड़े हुए हैं। मरुस्थलीय क्षेत्र होने के कारण फलोदी और लोहावट में पेयजल हमेशा प्राथमिक मुद्दा रहा है। छोटे ढाणी स्तर के ऐसे कार्य बड़े मेगा प्रोजेक्टों जितने व्यापक नहीं होते, लेकिन स्थानीय स्तर पर ये रोजमर्रा की पानी की उपलब्धता से सीधे जुड़े होते हैं।

विभाग के अनुसार, बजट घोषणा के बाद गांव स्तर तक कार्य पहुंचाने का यही उद्देश्य था कि पेयजल सुविधा केवल कागजों तक सीमित न रहे। फिलहाल दावा यह है कि निर्माण और पाइपलाइन संबंधी काम पूरे हो चुके हैं तथा लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंच रहा है। नियमित आपूर्ति की निरंतरता, पानी की गुणवत्ता और रखरखाव आगे भी निगरानी के विषय बने रहेंगे।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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