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पीएम कौशल विकास योजना का असर: ब्यूटीशियन बन आत्मनिर्भर हुईं अंबिकापुर की किरण केरकेट्टा

अम्बिकापुर: कभी सिर्फ एक हुनर के रूप में ब्यूटीशियन का काम सीखने वाली श्रीमती किरण केरकेट्टा आज कई महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत छह माह का प्रशिक्षण प्राप्त कर किरण ने न केवल अपना ब्यूटी पार्लर शुरू किया, बल्कि आज वह अपने परिवार का मजबूत आर्थिक सहारा भी बन चुकी हैं।

कौशल विकास से मिली सफलता की नई राह

अम्बिकापुर के पटेलपारा की रहने वाली किरण केरकेट्टा बताती हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से छह महीने का ब्यूटीशियन कोर्स पूरा किया। प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए हुनर को उन्होंने स्वरोजगार में बदलने का फैसला किया और एक छोटे स्तर पर अपना ब्यूटी पार्लर खोला। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी, जिससे उनका यह हुनर एक नियमित आजीविका में तब्दील हो गया।

हर महीने 12 से 20 हजार रुपये की शानदार आमदनी

किरण के मुताबिक, वर्तमान में उनके ब्यूटी पार्लर से हर महीने लगभग 12,000 से 20,000 रुपये तक की कमाई हो जाती है। इस आय से वह न केवल अपने परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि घर के अन्य खर्चों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “पीएम कौशल विकास योजना के कारण मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिला। आज मैं आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र हूं और घर का खर्च आसानी से चला पा रही हूं।”

स्वरोजगार के साथ दूसरों को भी दे रही हैं रोजगार

किरण की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत आजीविका तक सीमित नहीं है। अपने व्यवसाय को विस्तार देते हुए उन्होंने अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। वर्तमान में उनके पार्लर में दो से चार महिलाएं ब्यूटीशियन का काम सीख रही हैं। इस तरह किरण का हुनर अब अन्य जरूरतमंद महिलाओं के लिए भी आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।

पीएम मोदी और सीएम साय का जताया आभार

कौशल विकास से मिली इस बड़ी उपलब्धि और आत्मनिर्भरता के लिए किरण ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। छत्तीसगढ़ में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत किरण केरकेट्टा की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाएं महिलाओं को सशक्त कर उन्हें स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की ओर ले जा रही हैं।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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