मेरिट में पहला स्थान, फिर भी नियुक्ति नहीं; हाईकोर्ट ने सरकार को दिया चार सप्ताह का समय

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 27अक्टूबर।छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की चयन सूची में पहला स्थान हासिल करने के बावजूद पुरातत्व अधिकारी के पद पर नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थी को हाईकोर्ट से राहत मिली है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि दूसरे अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के कारण ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति रोकना उचित नहीं था,जिसकी नियुक्ति में देरी के लिए वह स्वयं जिम्मेदार नहीं था।
कांकेर जिले के गोविंदपुर निवासी हैग्रिव परिहार ने पुरातत्व अधिकारी के पद के लिए31मई2023को जारी विज्ञापन के आधार पर आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद17अगस्त2023को जारी मेरिट सूची में उनका नाम पहले स्थान पर था।
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पुरातत्व एवं संग्रहालय संचालनालय ने9अक्टूबर2023को उनकी नियुक्ति के आदेश जारी करने की अनुशंसा भी कर दी थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उन्हें नियुक्ति नहीं दी।
कुछ अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर शिकायतें मिलने पर जांच शुरू की गई थी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि जांच4जून2024को पूरी हो गई थी। इस दौरान किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दी गई।



