गौपालकों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिलने पर उठे सवाल, नकली दूध-पनीर के कारोबार पर वतन चन्द्राकर ने जताई चिंता
रामकुमार गुप्ता आरंग : मैदानी क्षेत्रों में गौपालन करने वाले पशुपालकों को सब्सिडी का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने का मुद्दा अब जोर पकड़ने लगा है। जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने इस पर चिंता जताते हुए शासन-प्रशासन से पशुपालकों के हित में नीतिगत सुधार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गौपालक चारे, पशुओं के रखरखाव और उपचार पर लगातार बढ़ते खर्च से परेशान हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं और अनुदान का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
वतन चन्द्राकर ने कहा कि गौपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने में क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी पात्र पशुपालकों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लाभ मिलना चाहिए।
नकली दूध-पनीर के कारोबार पर जताई चिंता
जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने दूध की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर का फायदा उठाकर बाजार में नकली दूध, पनीर और खोवा बेचे जाने की आशंका पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादों में मिलावट आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से मिलावट करने वालों के हौसले बढ़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की कि बाजार में बिकने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की नियमित जांच की जाए। संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जाए तथा मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच और कार्रवाई की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।
स्थानीय दूध उत्पादन को बढ़ावा देने की जरूरत
वतन चन्द्राकर ने कहा कि गौपालकों को आर्थिक संबल देने और स्थानीय दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने से पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके लिए सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना, पशुपालन से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से गौपालकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सब्सिडी संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा करने तथा मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए समन्वित नीति अपनाने की मांग की। उनका कहना है कि पशुपालकों को राहत देने और आम जनता को शुद्ध दूध एवं दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए ठोस पहल समय की जरूरत है।
