छत्तीसगढ़

‘सोना गिरवी रखकर पैसे दिए’: तीन गुजरातियों के इथियोपिया में ‘अपहरण’ का क्या था मामला

-श्याम बक्शी

(इस रिपोर्ट की कुछ जानकारियां परेशान कर सकती हैं.)

एक करोड़ रुपये दे दो, तभी इन्हें वापस भेजेंगे. नहीं तो इनके अंग एक-एक करके काटेंगे और तुम्हारे पास भेज देंगे.

इथियोपिया में बैठे एक अपहर्ता ने मेहसाणा के एक परिवार को यह धमकी दी थी.

जिन तीन लोगों के लिए फिरौती मांगी गई थी, उनमें एक युवक और दो युवतियां थीं.

एक अक्तूबर को जब ये तीनों मेहसाणा के वडस्मा गांव लौटे तो परिवार ने नज़र उतारकर उनका स्वागत किया.

तीनों चचेरे-ममेरे भाई-बहन
अपहरण के इस मामले में अब तक दो एजेंटों के नाम सामने आए हैं.
ऋत्विक, मयूरी और ममता आपस में चचेरे-ममेरे भाई-बहन हैं. तीनों एजेंटों की मदद से ग़ैर-क़ानूनी रास्ते से अमेरिका जाने के लिए निकले थे.

परिवार के मुताबिक़, 22 सितंबर को ममता ने अपने पिता को फ़ोन किया और कहा कि वे कनाडा पहुंच गए हैं.

इसके बाद 29 सितंबर तक परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ.

ममता के पिता किरीट चौहान ने मेहसाणा के लांघणज पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई.

बाद में परिवार को पता चला कि उनके तीनों बच्चों का कथित तौर पर इथियोपिया में अपहरण कर लिया गया है.

उन्हें छोड़ने के बदले अपहर्ताओं ने एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी.

ऋत्विक, मयूरी और ममता अमेरिका जाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एजेंटों की मदद ली थी.

इस मामले में अब तक दो एजेंटों के नाम सामने आए हैं.

इनमें एक मेहसाणा के डोंगरवा गांव का अल्पेश पांचाल और दूसरा वडोदरा का भार्गव पटेल है.

जिन एजेंट्स के ज़रिए ये तीनों अमेरिका जाने के लिए निकले थे, उनमें से एक ने पहले मीडिया से कहा था कि इन लोगों को राजस्थान के जयपुर से हवाई जहाज़ में बैठाया गया था. वहां से वे अबू धाबी और फिर इथियोपिया गए.

इसी परिवार के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी को बताया, उन्हें इथियोपिया में दो घंटे रुकना था. इसके बाद विमान बदलकर कनाडा जाना था.

लेकिन उनके इथियोपिया पहुंचने से पहले ही अपहर्ताओं को भारत से आ रहे तीनों लोगों के बारे में पूरी जानकारी थी.

परिवार के सदस्य के मुताबिक़, इथियोपिया पहुंचने पर अपहर्ताओं ने तीनों को नाम लेकर बुलाया. इससे उन्हें भरोसा हो गया कि ये लोग एजेंट्स ने ही भेजे हैं.

उनसे कहा गया कि एक रात इथियोपिया में रुकना होगा. अगली सुबह टिकट आ जाएगा और वे कनाडा के लिए निकल जाएंगे.

इसी बहाने तीनों को एक गाड़ी में बैठाकर एक मकान में ले जाया गया.

परिवार को अपहरण का पता कैसे चला?

परिवार के एक सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि इन तीनों के कथित अपहरण से कुछ दिन पहले कड़ी के एक युवक का भी इसी तरह अपहरण किया गया था.

परिवार के एक सदस्य के मुताबिक़, कड़ी के उस युवक को 53 लाख रुपये देकर अपहर्ताओं से छुड़ाया गया था.

रिहा होने के बाद युवक ने अपने परिवार को बताया कि जिस जगह उसे रखा गया था, वहां पास के गांव वडस्मा के तीन लोगों को भी लाया गया है.

इसके बाद युवक के परिवार ने वडस्मा में उन तीनों के परिवार से संपर्क किया.

इस तरह, तीन दिन बाद परिवार को पहली बार पता चला कि उनके तीनों बच्चों का अपहरण कर लिया गया है.

60 लाख दिए तो एक करोड़ मांगने लगे

ऋत्विक के परिवार के एक सदस्य ने दावा किया कि अपहर्ता बार-बार नए फ़ोन नंबरों से फ़ोन करता था.

उन्होंने बताया, वह हिंदी में बात करता था. इसलिए हमें लगा कि शायद वह भारतीय है.

परिवार के सदस्य के मुताबिक़, वह धमकी देता था, एक करोड़ रुपये दो, तभी इन्हें वापस भेजेंगे. नहीं तो इनके अंग एक-एक करके काटकर भेजेंगे.

उन्होंने बताया, एजेंट ने वीडियो कॉल पर ऋत्विक से बात कराई थी. वीडियो में उसके पीछे अपहर्ता बंदूक लेकर खड़े दिखाई दे रहे थे.

परिवार का दावा है कि अपहर्ताओं ने ऋत्विक और दोनों युवतियों को धमकाकर झूठ बोलने के लिए मजबूर किया.

उनसे कहलवाया गया, हम कनाडा पहुंच गए हैं. नीचे गाड़ी तैयार है और अब अमेरिका जाना है. इसके लिए पैसे भेज दो.

परिवार के सदस्य ने बताया, हमने कहा कि अभी 60 लाख रुपये भेज रहे हैं. जब ये लोग आगे पहुंच जाएंगे तो बाक़ी पैसे भी भेज देंगे.

असल में वे कनाडा नहीं पहुंचे थे. वे इथियोपिया से ही बात कर रहे थे. अपहर्ताओं ने उन्हें झूठ बोलने के लिए मजबूर किया था.

परिवार का दावा है कि रकम भेजने के लिए उन्हें एक स्कैनर भी भेजा गया था.

परिवार के सदस्य उसे लेकर मेहसाणा गए और वहां से पैसे ट्रांसफ़र किए.

परिवार का कहना है कि उनके पास पैसे भेजने की रसीद भी है.

परिवार के सदस्य ने बताया, हमने 60 लाख रुपये भेज दिए. इसके बाद उनकी मांग और बढ़ गई. वे एक करोड़ रुपये से कम लेने के लिए तैयार नहीं थे.

पहले उन्होंने आगे की यात्रा के नाम पर पैसे मांगे थे. बाद में साफ़ कहा कि तुम्हारे बच्चों का अपहरण किया गया है. उन्हें छुड़ाना है तो एक करोड़ रुपये भेजो.

परिवार का दावा है कि पैसे भेजे जा चुके थे, लेकिन अपहर्ता लगातार कह रहा था कि उसे यह रकम नहीं मिली है.

ऋत्विक ने वहां अपहर्ता और उस एजेंट के बीच बातचीत सुनी थी, जिसे उनकी आगे की यात्रा का इंतज़ाम करना था. बाद में ऋत्विक ने अपने परिवार को इस बातचीत के बारे में बताया.

परिवार ने सोना गिरवी रखा
परिवार का दावा है कि एजेंट ने हर व्यक्ति को अमेरिका पहुंचाने के लिए 80 लाख रुपये मांगे थे.

इस हिसाब से तीन लोगों के लिए कुल दो करोड़ 40 लाख रुपये देने थे.

लेकिन तीनों एक ही परिवार के थे. इसलिए आख़िर में प्रति व्यक्ति 70 लाख रुपये के हिसाब से दो करोड़ 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ.

इस रकम के बदले तीनों को अमेरिका तक पहुंचाने की बात हुई थी.

परिवार के सदस्य ने बताया, कुछ पैसे दोस्तों से लिए और बाक़ी रकम जुटाने के लिए अपने पास मौजूद 20 से 25 तोला सोना गिरवी रख दिया. सोना अब भी गिरवी रखा हुआ है.

उन्होंने कहा, अमेरिका में मेरे कई दोस्त और रिश्तेदार हैं. उन सभी ने कहा था कि बच्चे वहां पहुंच जाएं तो वे वहीं से पैसों का इंतज़ाम कर देंगे.

उन्होंने कहा था कि चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. इसी भरोसे पर हमने इतना बड़ा जोखिम उठाया.

गुजरात में क्या करते थे ये तीनों लोग?

वडस्मा के रहने वाले ऋत्विक की उम्र 23 साल है. वह दसवीं कक्षा पास नहीं कर पाए थे और उन्होंने वायरमैन का कोर्स किया था. उनके पिता को कैंसर है. ऋत्विक का एक भाई भी है.

परिवार के एक सदस्य ने बताया, हमने सोचा था कि इससे पिता के इलाज का ख़र्च निकल जाएगा. उन्हें यह तसल्ली भी रहेगी कि उनका एक बेटा अमेरिका में है. इसीलिए ऋत्विक को भेजने का फ़ैसला किया गया था.

ममता चावड़ा ने बीएससी के बाद बीएड किया है. उन्होंने कुछ समय तक शिक्षिका के तौर पर भी काम किया था. उनकी शादी तीन साल पहले हुई थी और उनके पति इस समय अमेरिका में हैं.

पुलिस के मुताबिक़, उनके पति छह महीने पहले स्टूडेंट वीज़ा पर अमेरिका गए थे.

परिवार ने ममता को क़ानूनी तरीक़े से अमेरिका भेजने के लिए पांच बार कोशिश की थी. लेकिन हर बार उनका वीज़ा ख़ारिज हो गया.

इसके बाद परिवार ने तय किया कि भले ही ग़ैर-क़ानूनी रास्ता अपनाना पड़े, लेकिन ममता को अमेरिका भेजना है.

मयूरी गांधीनगर में रहती हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले पर अपनी रिपोर्ट में विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा, इथियोपिया में तीन भारतीय नागरिकों का अपहरण हुआ था. स्थानीय अधिकारियों ने तीनों को सुरक्षित छुड़ा लिया है.

लांघणज पुलिस थाने के इंस्पेक्टर एएम गहलोत ने बीबीसी संवाददाता रॉक्सी गागडेकर छारा को बताया, इस मामले में शिकायत दर्ज कर ली गई है. एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, लेकिन वह बिचौलिया है. मुख्य एजेंट अब तक पकड़ा नहीं गया है और उसकी तलाश जारी है.

परिवार का दावा है कि उसने अपहर्ताओं को पैसे दिए थे. लेकिन पुलिस ने इससे अलग जानकारी दी है.

इंस्पेक्टर गहलोत ने कहा, परिवार ने अपहर्ता को कोई पैसा नहीं दिया. हमारी जानकारी के मुताबिक़, बातचीत के दौरान परिवार ने किडनैपर को भरोसा दिला दिया था कि उसके पास देने के लिए पैसे ही नहीं हैं.

उन्होंने बताया कि बाबा ख़ान नाम के व्यक्ति ने तीनों का अपहरण किया था और वही उनके परिवार से बात कर रहा था.

इस नए डंकी रूट पर दूसरे एजेंटों ने क्या कहा?
एक एजेंट ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी से कहा, यूरोप और मेक्सिको के रास्ते इस तरह का काम चलता है. लेकिन इथियोपिया से भी ऐसा कोई रास्ता चल रहा है, यह हमारे लिए भी नई बात है.

जिन एजेंटों के नाम सामने आए हैं, वे हमारे नेटवर्क के नहीं हैं. उनसे दूर-दूर तक हमारा कोई संपर्क नहीं है.

एजेंट ने कहा, यह भी हो सकता है कि लोगों को दुबई से इथियोपिया ले जाकर अपहरण के नाम पर ठगने की पूरी योजना पहले ही बनाई गई हो.

उन्होंने कहा, अमेरिका की सीमा पर इस समय इतनी सख़्ती है कि ये सारे रास्ते बंद हैं और इस तरह लोगों को भेजने का काम नहीं चल रहा है.

मेक्सिको में देखते ही गोली मारने के आदेश हैं. इसलिए आमतौर पर वहां के रास्ते से भी लोगों को नहीं भेजा जा रहा है.

डंकी रूट के बारे में उन्होंने बताया, आमतौर पर भारत से दुबई, यूरोप और कनाडा के रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा दुबई से यूरोप और फिर मेक्सिको के रास्ते भी लोग जाते हैं.

पहले दुबई वाले रास्ते पर लोगों को चार्टर्ड विमानों से भेज दिया जाता था. लेकिन अब वह व्यवस्था भी बंद हो गई है.

लोगों को किस तरह ठगा जाता है?

वडोदरा के ट्रैवल एजेंट ऋषभ शाह कहते हैं, अब ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से विदेश भेजने का मतलब केवल किसी व्यक्ति को उस देश तक पहुंचाना नहीं रह गया है.

कुछ लोगों को ग़ैर-क़ानूनी काम कराने या प्रतिबंधित सामान की तस्करी करवाने के लिए भी इस तरह विदेश ले जाया जाता है.

उन्होंने कहा, लोगों को जंगल के रास्ते किसी देश में ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से दाख़िल कराया जाता है. इसके बाद वहां की पुलिस से उन्हें पकड़वा दिया जाता है.

फिर उन्हें छुड़ाने के नाम पर ब्लैकमेल किया जाता है और किसी दूसरे ग़ैर-क़ानूनी काम में फंसा दिया जाता है.

ऋषभ शाह ने उदाहरण देते हुए कहा, कुछ लोगों को यहां से दुबई ले जाया जाता है. वहां उन्हें रोककर किसी नौकरी पर रखा हुआ दिखाया जाता है.

इसके बाद उनके नाम पर फ़र्ज़ी खाते खोले जाते हैं और क़र्ज़ के लिए आवेदन किया जाता है. यहां से गए लोगों को पहले से तय रकम देकर वहां से भेज दिया जाता है. कुछ लोगों को किसी दूसरे देश में भेजकर इस तरह फंसा दिया जाता है कि आख़िर में उन्हें वहां से निकालकर वापस भेज दिया जाता है.

ऋषभ शाह कहते हैं, इस तरह फंसे लोग जितनी जल्दी इससे बाहर निकल जाएं, उतना ही उनके लिए अच्छा है. नहीं तो उन्हें अलग-अलग तरीक़ों से बहुत परेशान किया जाता है.

समय के साथ लोगों को फंसाने के नए-नए तरीक़े सामने आ रहे हैं.

वह बताते हैं कि लोगों को फंसाने का कोई एक तय तरीक़ा नहीं है.

भारत में काम कर रहे स्थानीय एजेंटों को भी कई बार आगे की असली स्थिति का पता नहीं होता.

उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि विदेश भेजे जाने के बाद लोगों को इतनी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

ऋषभ कहते हैं, स्थानीय एजेंट भी आगे के एजेंटों के भरोसे लोगों को तैयार करके भेज देते हैं और वे लोग इस तरह फंस जाते हैं.

ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से विदेश गए लोगों को पकड़ा और वापस भेजा जा सकता है
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चार दिसंबर 2025 को राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया था.

उन्होंने बताया था कि साल 2009 से 28 नवंबर 2025 तक अमेरिका ने कुल 18,822 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा था.

इन आंकड़ों के मुताबिक़, नवंबर 2025 तक सबसे ज़्यादा 3,258 भारतीय नागरिकों को उसी साल अमेरिका से वापस भेजा गया था.

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 21 मार्च 2025 को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया था कि साल 2009 से 2024 के बीच अमेरिका ने 15,564 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा.

जनवरी 2025 से 21 मार्च 2025 के बीच यह संख्या 388 थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.(bbc.com/hindi)

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button