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मेट्रो में गूंजी दादू की आवाज, पोते रुशान के चेहरे पर छाई हैरानी और खुशी

दिल्ली मेट्रो की ट्रेन में जब हिन्दी अनाउंसमेंट की परिचित आवाज गूंजी, तो शम्मी नारंग के पोते रुशान के चेहरे पर हैरानी और खुशी साफ नजर आई। परिवार के साथ हुई यह मेट्रो यात्रा नारंग परिवार के लिए एक खास पल बन गई। सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो में बच्चे को ट्रेन के अंदर दादू की आवाज सुनकर प्रतिक्रिया देते देखा जा सकता है।

शम्मी नारंग पूर्व दूरदर्शन समाचार वाचक और वॉयस आर्टिस्ट हैं। दिल्ली मेट्रो की हिन्दी अनाउंसमेंट उन्हीं की आवाज में होती है। ‘अगला स्टेशन…’ और ‘कृपया दरवाजों से दूर रहें’ जैसी पंक्तियां रोज लाखों यात्रियों तक उनकी आवाज से पहुंचती हैं। उनकी आवाज गुरुग्राम रैपिड मेट्रो, मुंबई मेट्रो, बेंगलुरु मेट्रो, जयपुर मेट्रो और हैदराबाद मेट्रो की हिन्दी घोषणाओं में भी सुनी जाती है। अंग्रेजी अनाउंसमेंट पूर्व दूरदर्शन एंकर रिनी सिमोन खन्ना की आवाज में होती हैं।

रुशान शम्मी नारंग और डॉली नारंग के पोते हैं। नवंबर 2024 में शम्मी नारंग ने सोशल मीडिया पर पोते के जन्म की जानकारी साझा की थी और लिखा था कि वे और डॉली अब दादू-दादी बन गए हैं। रुशान उनके बेटे दिशांत नारंग और बहू रिधिमा नारंग के पुत्र हैं। हाल में परिवार रुशान को मेट्रो यात्रा पर ले गया। वीडियो में बच्चे को स्टेशन और ट्रेन में परिवार के साथ देखा जा सकता है। ट्रेन के अंदर अनाउंसमेंट शुरू होते ही वह उस आवाज की ओर ध्यान देता दिखा, जिसे वह घर पर दादू की आवाज के रूप में पहचानता है।

इस पल पर शम्मी नारंग ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी आवाज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंच रही है और शायद आने वाली पीढ़ियां भी इसे सुनती रहेंगी। पहले भी उन्होंने कहा है कि तकनीक बदलने के बावजूद यह आवाज समय की कसौटी पर खरी उतरी है और आने वाली पीढ़ियां भी इसे सुनकर गर्व महसूस कर सकती हैं।

शम्मी नारंग का जन्म 25 नवंबर 1956 को दिल्ली में हुआ। वे मैकेनिकल इंजीनियरिंग के स्नातक हैं। आवाज के क्षेत्र में उनकी शुरुआत वॉयस ऑफ अमेरिका के हिन्दी विभाग से हुई। इसके बाद वे दूरदर्शन से जुड़े और 1980-90 के दशक में राष्ट्रीय समाचार वाचन के लिए पहचाने गए। दिल्ली मेट्रो की शुरुआत के समय ई. श्रीधरन के नेतृत्व में शाहदरा-तिस हजारी खंड के ट्रायल के दौरान उनकी और रिनी सिमोन खन्ना की आवाज चुनी गई थी। तब से यह आवाज मेट्रो यात्रा का हिस्सा बनी हुई है।

यात्री उन्हें अक्सर ‘मेट्रो अंकल’ के नाम से भी याद करते हैं। स्कूलों में बच्चे उन्हें इसी पहचान से पुकारते हैं। नारंग कहते रहे हैं कि मेट्रो अनाउंसमेंट में उच्चारण और ठहराव इसलिए साधे जाते हैं, ताकि भीड़ और शोर के बीच संदेश साफ पहुंचे। रुशान के साथ यह यात्रा उसी आवाज को परिवार की अगली कड़ी से जोड़ने वाला पल बन गई।

अनीता शर्मा

एक संवेदनशील और शांत स्वभाव की महिला हैं। घर-परिवार के बीच रहकर उन्होंने ज़िंदगी के छोटे-छोटे पड़ावों को करीब से देखा है। उन्हें सुबह की सैर, घर के आंगन में बैठकर चाय पीना और पुरानी पत्रिकाएँ पढ़ना पसंद है। वे आसपास के लोगों के सुख-दुख को दिल से महसूस करती हैं। उनकी सोच साफ और सीधी है — जो दिखे, वही कहें, बिना बढ़ा-चढ़ाए।

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