यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयास तेज किए हैं, रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत जारी: जयशंकर

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत ने हाल के महीनों में रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों में पहले से अधिक सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली अब केवल संवाद और कूटनीति की वकालत तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और यूक्रेन दोनों के साथ सीधे बातचीत कर रही है।
जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत कई वर्षों से इस संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत का पक्षधर रहा है, लेकिन हाल के महीनों में वह सलाह देने से आगे बढ़कर इसमें थोड़ा अधिक शामिल हुआ है। उनके अनुसार, दोनों पक्षों के साथ बातचीत जारी है और भारत मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
काला सागर, अनाज और ऊर्जा पर फोकस
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की कोशिशों की शुरुआत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा से हुई है। इसके अलावा बातचीत उन तात्कालिक मुद्दों पर भी केंद्रित है, जिन पर रूस और यूक्रेन दोनों की चिंता है। इनमें अनाज निर्यात, ऊर्जा निर्यात और एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले न करने की संभावनाएं शामिल हैं। जयशंकर ने इन बातचीत को जारी बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस युद्ध का अंत चाहता है और मानता है कि इसका समाधान संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही निकलेगा। युद्ध फरवरी 2022 से चल रहा है और अब अपने पांचवें वर्ष में है।
यूक्रेन ने भारत के प्रस्ताव को सबसे व्यापक बताया
जयशंकर के बयान से कुछ दिन पहले यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा था कि कीव के पास चार प्रस्ताव हैं और इनमें भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार भारत ने इस प्रक्रिया में भूमिका निभाने की इच्छा जताई है। सिबिहा के अनुसार, यूक्रेन काला सागर में ऊर्जा और कृषि संबंधी विराम पर विचार करने के लिए तैयार है तथा संपर्क रेखा पर बिना शर्त युद्धविराम के लिए भी खुला है।
इससे पहले 3 सितंबर को जयशंकर ने कीव में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और विदेश मंत्री सिबिहा से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने कहा था कि यदि भारत किसी भी रूप में मदद कर सकता है, तो वह तैयार है। बैठक में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी चर्चा हुई थी। जयशंकर ने कहा था कि काला सागर में हमलों का असर ऊर्जा, कृषि और खाद्य आपूर्ति पर पड़ रहा है तथा कई झंडों के जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविक भी हताहत हुए हैं।
मोदी और पुतिन की बातचीत का संदर्भ
कीव यात्रा से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। मोदी ने कहा था कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना चाहिए। 1 अक्टूबर को पुतिन ने कहा था कि मोदी संघर्ष समाप्त करने का मुद्दा लगातार उठाते हैं और उनके पास अच्छे विचार हैं।
सितंबर में वारसॉ में भी जयशंकर ने कहा था कि भारत यूक्रेन और रूस दोनों के निरंतर संपर्क में है तथा ऐसे विचार तलाश रहा है जो संघर्ष को कम करने और अंततः समाप्त करने में योगदान दे सकें। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उन्होंने समुद्री यात्रियों की सुरक्षा तथा खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति की तत्काल जरूरत का जिक्र किया था।
भारत का रुख लंबे समय से यह रहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा। नई दिल्ली दोनों पक्षों के साथ संबंध रखती है और वैश्विक दक्षिण पर खाद्य, ईंधन और उर्वरक आपूर्ति के असर को लेकर चिंता जताती रही है।



