हाईकोर्ट ने पति को दी तलाक की मंजूरी, लगातार झगड़े और अविश्वास को माना मानसिक क्रूरता

फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 14अक्टूबर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में पति को तलाक की मंजूरी देते हुए कहा कि लगातार झगड़े,गहरा अविश्वास और परिवार के सदस्यों के साथ तनावपूर्ण रिश्ते मानसिक क्रूरता का कारण बन सकते हैं। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने पति की अपील स्वीकार करते हुए जगदलपुर फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।
जगदलपुर निवासी मितेश पाणिग्रही ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा13(1)(a)के तहत पत्नी वेदमती उर्फ ममता से तलाक की मांग की थी। पति का आरोप था कि पत्नी कम आमदनी को लेकर ताने देती थी,उसके चरित्र पर संदेह करती थी और मां से अलग रहने का दबाव बनाती थी। उसने गाली-गलौज,मारपीट और दुर्व्यवहार के भी आरोप लगाए थे।
फैमिली कोर्ट ने10दिसंबर2022को तलाक की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयान और उपलब्ध सबूतों की जांच की। बेंच ने कहा कि गर्भपात,आत्महत्या की धमकी और दूसरे व्यक्तिगत आरोपों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में अपने आप में मानसिक क्रूरता का आधार नहीं माना जा सकता।
हालांकि,गवाहों के बयानों से लगातार झगड़े,आपसी अविश्वास,परिवार के सदस्यों से खराब संबंध और साथ रहने के तौर-तरीकों को लेकर बार-बार होने वाले विवादों की पुष्टि हुई।
हाईकोर्ट ने माना कि ऐसे लगातार तनावपूर्ण हालात पति के मानसिक स्वास्थ्य और शांति पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इसी आधार पर बेंच ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त कर पति को तलाक की मंजूरी दे दी।



