आस्था के दीपों से जगमगाए देवालय मंदिरों में उमड़ा भक्तों का भारी भीड़
छुईखदान: शक्ति की साधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि पूरे देश सहित धर्मनगरी छुईखदान में भी बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। शहर और आसपास के अंचल में आस्था के जोत जगमगाने लगे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। सुबह से लेकर देर रात तक माता के दर्शन के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्तों का उत्साह और श्रद्धा इस बार अपने चरम पर है। नगर की आराध्य देवी मां काली मंदिर में इस वर्ष भक्तों की आस्था का अनूठा रूप देखने को मिल रहा है। इस वर्ष माता के दरबार में मनोकामना ज्योति कलशों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। स्वयं प्रकट हुई थी मूर्ति इतिहास के झरोखे से देखें तो रियासत कालीन समय में मुकुंद सागर तालाब की खुदाई के दौरान मां काली की भव्य मूर्ति स्वयं भू-गर्भ से प्रकट हुई थी। जिस स्थान पर माता की मूर्ति मिली, ठीक उसी स्थान पर इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। रियासत कालीन होने के कारण इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।
शहर के टिकरीपारा में ऊंचे टीले पर स्थित माता वैष्णो देवी का मंदिर दिनों-दिन श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। मान्यता है कि यहाँ आने वाले हर भक्त की झोली खाली नहीं रहती। इस शारदीय नवरात्रि में यहाँ भी ज्योति कलशों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। तेल ज्योति कलश 143, घृत (घी) ज्योति कलशथ आठ प्रज्वलित की गई है।
कोड़का के ”मां महामाया मंदिर” में विशेष रौनक
छुईखदान रियासत काल की प्राचीन राजधानी रहे कोड़का स्थित मां महामाया मंदिर में भी नवरात्रि की विशेष धूम है। प्राचीन ऐतिहासिक महत्व होने के कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं। महामाया मंदिर तेल के 377, शनिदेव मंदिर 68, शीतला मंदिर में पांच ज्योति कलश प्रज्जवलित की गई है।
