पत्नी को साथ रहने के लिए मजबूर नहीं करा सकता पति

हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंध बहाल करने की अपील ठुकराई
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 29अक्टूबर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंध बहाल करने की मांग करने वाले पति की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के अदालत में पेश नहीं होने या पति के बयान का विरोध नहीं होने मात्र से यह साबित नहीं हो जाता कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अलग रह रही है। पति को अपने दावे के जरूरी तथ्यों को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा।
जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने अंबिकापुर फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
मामला सिद्धार्थ यादव और मधु यादव का है। दोनों की शादी7मई2017को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हुई थी। उनकी बेटी का जन्म9सितंबर2019को हुआ। फिलहाल बेटी अपनी मां के साथ रहती है।
पति का आरोप था कि शादी के करीब एक साल बाद पत्नी छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने लगी थी। बेटी के अन्नप्राशन संस्कार के बाद वह अपने भाई के साथ मायके चली गई और वापस नहीं लौटी। पति ने दावा किया कि वह पत्नी और बेटी के खर्च उठाता रहा तथा उन्हें वापस लाने की कोशिश भी की।
पत्नी को समन मिलने के बाद भी वह अंबिकापुर फैमिली कोर्ट में पेश नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने एकतरफा कार्यवाही की। पति ने दलील दी कि उसके और उसके पिता के बयान का विरोध नहीं किया गया,इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक संबंध बहाल करने की मांग खारिज कर दी।
हाईकोर्ट में पत्नी की ओर से कहा गया कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सही फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने पाया कि पति की ओर से पेश दस्तावेजों में पत्नी के अलग रहने की वजह उत्पीड़न बताई गई थी। फैमिली कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि पत्नी को वापस लाने के लिए गंभीर प्रयास करने के बजाय पति ने करीब एक साल नौ महीने बाद याचिका दायर की।
डिवीजन बेंच ने कहा कि पत्नी की अनुपस्थिति को पति के दावे की पुष्टि नहीं माना जा सकता। पति को यह साबित करना होगा कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के उससे अलग रह रही है। उपलब्ध साक्ष्यों में ऐसा कोई आधार नहीं मिला,जिससे फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप किया जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही में लगाए गए आरोप यदि आगे चलकर झूठे साबित होते हैं तो वह उचित कानूनी उपाय अपना सकता है। फिलहाल अपील खारिज कर दी गई।



