भारत के स्वदेशी ‘कावेरी ड्राई इंजन’ ने रूस में पास की अग्निपरीक्षा, अमेरिका को लगा बड़ा झटका

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए भारत ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। भारत के स्वदेशी ‘कावेरी ड्राई इंजन’ (Kaveri Dry Engine) ने रूस में अपने बेहद कठिन हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस शानदार उपलब्धि को रक्षा क्षेत्र में अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबदबे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारत की विदेशी इंजनों पर निर्भरता खत्म होने का रास्ता साफ हो गया है।
तय लक्ष्य से ज्यादा ताकत की हासिल
रूस में हुए परीक्षणों के दौरान कावेरी ड्राई इंजन ने अपनी क्षमता से दुनिया को चौंका दिया है। इस स्वदेशी इंजन ने 46 किलोन्यूटन (kN) के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 48.5 किलोन्यूटन का पीक ड्राई थ्रस्ट हासिल किया है। यह सफलता साबित करती है कि भारतीय वैज्ञानिकों (DRDO और GTRE) द्वारा तैयार की गई इंजन की डिजाइन और इंजीनियरिंग विश्वस्तरीय मानकों पर पूरी तरह खरी उतरी है।
रूस की कठिन परिस्थितियों में हुआ परीक्षण
इस स्वदेशी इंजन का परीक्षण रूस के दो प्रमुख संस्थानों—सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मोटर्स (CIAM) और ग्रोमोव फ्लाइट रिसर्च इंस्टीट्यूट—में किया गया।
- हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल्स: इंजन को ऐसी चरम परिस्थितियों में परखा गया, जहां हवा का दबाव और तापमान बेहद कम होता है। ऊंचाई वाले इलाकों में इंजन का प्रदर्शन पूरी तरह स्थिर रहा।
- फ्लाइट ट्रायल्स: हवा में परीक्षण के लिए एक मॉडिफाइड इल्यूशिन Il-76 विमान के एक इंजन को हटाकर उसकी जगह कावेरी इंजन लगाया गया। उड़ान के दौरान अलग-अलग दबाव और गति पर इंजन की क्षमता बेहतरीन रही।
अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह झटका क्यों है?
लंबे समय से भारत अपने लड़ाकू विमानों और सैन्य ड्रोन्स को ताकत देने के लिए अमेरिकी (जैसे GE एयरोस्पेस के इंजन) और अन्य विदेशी इंजनों पर निर्भर रहा है। रक्षा सौदों में इंजन तकनीक आसानी से साझा नहीं की जाती। कावेरी ड्राई इंजन की इस सफलता का सीधा अर्थ है कि भविष्य के मानवरहित एयर प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत की आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। स्वदेशी इंजन विकसित होने से भारत को रणनीतिक स्वायत्तता मिलेगी, जो वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़ा बदलाव है।
‘घातक’ स्टील्थ ड्रोन को मिलेगी स्वदेशी ताकत
कावेरी इंजन का यह ड्राई वर्जन (बिना आफ्टरबर्नर वाला संस्करण) DRDO के आगामी ‘घातक’ (Ghatak UCAV) स्टील्थ ड्रोन के लिए तैयार किया जा रहा है। यह एक बिना पायलट वाला घातक लड़ाकू विमान है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर मिशन को अंजाम देगा। ड्रोन जैसे प्लेटफॉर्म के लिए ड्राई इंजन सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इसमें लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए कम ईंधन खपत, स्थिर थ्रस्ट और स्टील्थ (रडार से बचने की) विशेषताओं की आवश्यकता होती है।
आगे का रास्ता: सेमिलैक (CEMILAC) सर्टिफिकेशन
रूस में सफल ट्रायल के बाद, अब इस इंजन के टेस्ट डेटा की समीक्षा की जाएगी और इसे सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। सर्टिफिकेशन मिलने के बाद इंजन को प्रोटोटाइप में इंटिग्रेट किया जाएगा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करेगा। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारतीय रक्षा अनुसंधान के लिए एक बड़ी जीत है।



