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कानपुर में 25 वर्षीय गर्भवती रेनू की संदिग्ध मौत का पर्दाफाश: बगीचे में मिला था शव, दो प्रेमी गिरफ्तार

कानपुर: घाटमपुर के पतारा क्षेत्र में 25 वर्षीय रेनू सोनकर की संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। अगस्त 2026 में एक बगीचे में उनका शव मिलने के बाद से पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी थी। पोस्टमार्टम में मृतका के छह से सात महीने की गर्भवती होने की पुष्टि के बाद जांच ने नया मोड़ लिया। अब पुलिस ने इस मामले में रेनू के दो प्रेमियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मौत के असली कारणों की तह तक पहुंचने के लिए डीएनए (DNA) जांच का सहारा लिया जा रहा है।

बगीचे में मिला था शव, पोस्टमार्टम में खुले राज

पतारा निवासी राजेंद्र सोनकर की 25 वर्षीय बेटी रेनू का शव तिलसड़ा रोड पर एक बगीचे में मिला था। सूचना पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की गहनता से जांच की। शुरुआत में परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो पता चला कि रेनू गर्भवती थी। इसके बाद पुलिस ने मृतका के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली, जिससे पूरी कहानी की परतें खुलती चली गईं।

कॉल डिटेल से पुलिस तक पहुंचे दो नाम

कॉल डिटेल खंगालने पर पुलिस को पता चला कि रेनू दो लोगों के लगातार संपर्क में थी। इनमें पहला नाम फतेहपुर के जहानाबाद थाना क्षेत्र के नरैनी गांव निवासी 28 वर्षीय प्रांजुल पाल का था, जबकि दूसरा नाम पतारा के ही रहने वाले 50 वर्षीय अरविंद उर्फ गोले पांडेय का था। घटना से एक रात पहले भी रेनू की इन दोनों से बातचीत हुई थी। पुलिस ने इन दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

गोले पांडेय की भूमिका और खौफनाक साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि गोले पांडेय और रेनू के बीच कई सालों से संबंध थे। गोले ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात रेनू ने उसे फोन कर कोई दवा खाने (जहरीला पदार्थ) की जानकारी दी थी। इसके बाद वह मौके पर पहुंचा और रेनू को एक निजी अस्पताल ले गया, जहां से उसे कानपुर के एलएलआर (हैलेट) अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल ले जाने से पहले गोले पांडेय ने अविवाहित रेनू की मांग में सिंदूर भरा, बिंदी लगाई और पैरों में बिछिया पहनाई, ताकि अस्पताल के कर्मचारियों को लगे कि वह एक विवाहिता है और किसी को कोई शक न हो।

शव को एंबुलेंस से लाकर बगीचे में फेंका

पुलिस के मुताबिक, एलएलआर अस्पताल में मृत घोषित होने के बाद गोले पांडेय पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए शव को अपनी बेटी बताकर रोने लगा और वहां से शव ले आया। उसने एक प्राइवेट एंबुलेंस की मदद ली और शव को रात के अंधेरे में पतारा स्थित उसी बगीचे में छोड़कर फरार हो गया, जहां अगली सुबह पुलिस ने उसे बरामद किया।

डीएनए जांच से सुलझेगी जैविक पिता की गुत्थी

रेनू कुछ समय से अपने परिवार से अलग रह रही थी और भटकाव का जीवन जी रही थी। चूंकि रेनू गर्भवती थी और उसके दोनों आरोपियों (प्रांजुल और गोले पांडेय) से संबंध होने की बात सामने आई, इसलिए पुलिस ने गर्भस्थ शिशु का डीएनए सुरक्षित कर लिया है। अब दोनों आरोपियों के डीएनए का मिलान कराया जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता कौन है।

दोनों आरोपी गिरफ्तार, पुलिस की जांच जारी

कानपुर पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में दोनों आरोपियों—प्रांजुल पाल और अरविंद उर्फ गोले पांडेय—को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। एसीपी के अनुसार, मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है। रेनू की मौत वास्तव में किस कारण हुई और इसमें कानूनी जिम्मेदारी किसकी बनती है, इसका अंतिम निर्णय जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

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