छत्तीसगढ़

अरपा नदी में अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती, दोषी को तीन साल की जेल

विशेष अदालत ने लगाया 26 हजार रुपये का जुर्माना, जब्त रेत भी शासन के पक्ष में राजसात

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 29 अक्टूबर। अरपा नदी में अवैध रेत उत्खनन और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने के मामले में विशेष अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने दोषी कुंवर सिंह कंवर को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत कुल 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अभियोजन के मुताबिक, 17 जून 2025 को सुबह करीब 8:10 बजे बेलगहना के नायब तहसीलदार राजस्व टीम और पुलिस के साथ रेत उत्खनन स्थलों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान कोटा थाना क्षेत्र के नगोई घाट पर अरपा नदी से अवैध रूप से रेत निकालने का मामला सामने आया।

मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक सीजी 10 बीई 7869 से रेत का परिवहन किया जा रहा था। टीम को देखकर चालक वाहन छोड़कर भाग गया। जांच में रेत के उत्खनन और परिवहन से जुड़े वैध दस्तावेज, रॉयल्टी रसीद और खनन पट्टा नहीं मिले।

अदालत ने सलका निवासी कुंवर सिंह कंवर, पिता सम्मार सिंह, को भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत तीन साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के नियम 71 और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं चुकाने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। मामले में जब्त अवैध रेत को भी राज्य शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश दिया गया है।

फैसले में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के परमेश्वरी बनाम तमिलनाडु राज्य (2026) मामले का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट को केवल आर्थिक नुकसान के रूप में नहीं देखा जा सकता। अवैध रेत उत्खनन से नदी की प्राकृतिक बनावट, जलस्तर और पानी के बहाव पर असर पड़ता है। इसका नुकसान मौजूदा आबादी के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी उठाना पड़ता है।

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