मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में सौरभ भारद्वाज और नेहा बोरा समेत कई लोग हिरासत में

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अलग-अलग मार्च के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें आप की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल हैं।
यह विरोध लगातार तीसरे दिन चला। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं। नई दिल्ली जिले में धारा 163 के तहत पाबंदी लागू होने और अनुमति न मिलने के बाद भी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।
इंडिया गेट पर आप का मार्च
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इंडिया गेट की ओर मार्च निकाला। पुलिस ने सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा समेत पार्टी के कम से कम 25 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर ले जाया गया।
हिरासत के दौरान भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें फुटबॉल की तरह उठा-पटक रही है और सिर नीचे तथा पैर ऊपर करके ले जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला पत्रकारों की शिकायत के बावजूद संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही। तीन महिला पत्रकारों ने 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।
नेहा बोरा की हिरासत पर आइसा का आरोप
अलग घटनाक्रम में आइसा कार्यकर्ता अशोका रोड पर आंध्र भवन सर्कल से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा के बीच पुलिस ने नेहा बोरा समेत कई कार्यकर्ताओं को रोका और हिरासत में लिया।
आइसा ने आरोप लगाया कि नेहा बोरा को बिना आधिकारिक नंबर प्लेट वाले वाहन में ले जाया गया और उसमें कोई महिला कांस्टेबल मौजूद नहीं थी। संगठन ने कहा कि शुरुआत में उनके ठिकाने की जानकारी नहीं थी। पुलिस ने महिलाओं के साथ बदसलूकी के आरोपों से इनकार किया है।
पिछले दो दिनों का घटनाक्रम
2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। इनमें आप की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज भी शामिल थे। कुछ रिपोर्टों में इस दिन हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 700 से 1,000 बताई गई।
3 अक्टूबर को पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे करीब 150 लोगों को रोका गया। इनमें नेहा बोरा, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण शामिल थे। पुलिस का कहना है कि पाबंदी के बावजूद जमावड़ा करने पर लोगों को चेतावनी दी गई और न मानने पर हिरासत में लिया गया।
रविवार को भी जंतर-मंतर और इंडिया गेट के आसपास भारी बल तैनात रहा। प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया की समीक्षा की मांग पर अड़े रहे।



