मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड: सौरभ राजपूत मर्डर केस में आज कोर्ट का फैसला
उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को जिला अदालत फैसला सुनाएगी। मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के खिलाफ अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हो चुकी है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत पहले यह तय करेगी कि दोनों आरोपी दोषी हैं या नहीं। दोष सिद्ध होने पर सजा पर अलग से सुनवाई होगी।
मामला क्या है
पुलिस के अनुसार, मार्च 2025 में मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या का मामला सामने आया। आरोप है कि पत्नी मुस्कान और साहिल ने मिलकर हत्या की और शव को नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से सील करने की कोशिश की। ड्रम भारी होने और दुर्गंध आने पर मजदूरों को संदेह हुआ, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सौरभ और मुस्कान का प्रेम विवाह 2016 में हुआ था। दोनों आरोपी मार्च 2025 से जेल में हैं।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि हत्या सुनियोजित थी। अदालत में नशीली गोलियां, चाकू, नीला ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदने से जुड़े साक्ष्य पेश किए गए। अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है।
ट्रायल और गवाह
मामले में करीब 13 महीने का ट्रायल चला। अदालत में 126 पेशियां हुईं और अभियोजन की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। इनमें सौरभ के परिवार के सदस्य, दोस्त और वे दुकानदार शामिल हैं जिनसे ड्रम, दवाइयां, चाकू और सीमेंट खरीदे जाने का दावा है। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता विजय बहादुर के अनुसार, हत्या के बाद आरोपियों के घूमने जाने से जुड़े साक्ष्य भी अदालत में रखे गए।
बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने आरोपियों द्वारा हत्या किए जाने से इनकार किया है। आरोपी पहले भी अदालत में कह चुके हैं कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
परिवारों का पक्ष
मृतक सौरभ राजपूत की मां का आरोप है कि हत्या के बाद मुस्कान और साहिल शव को कमरे में बंद कर घूमने चले गए थे। मकान खाली करने के दबाव के बाद शव को ड्रम में रखकर शिफ्ट करने की कोशिश हुई। पड़ोसियों के हवाले से परिवार का दावा है कि बच्ची ने भी कुछ देखा था।
मुस्कान के पिता ने भी बेटी के कथित कृत्य पर सख्त रुख अपनाया है और कड़ी सजा की मांग की है। ये बयान आरोप हैं। अंतिम निर्णय अदालत का होगा।
जेल में आरोपी
मेरठ जेल प्रशासन के अनुसार, मुस्कान जेल में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों में समय बिता रही है। साहिल अन्य बंदियों से दूरी बनाए रखता है। पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी हो सकती है।
अदालत का फैसला साक्ष्यों और कानून के आधार पर आएगा। फैसला आने तक आरोप सिद्ध नहीं माने जाते।



