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मनी लॉन्ड्रिंग मामला: विशेष NIA कोर्ट ने यासीन मलिक समेत 7 आरोपियों पर PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया

नई दिल्ली: दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मोहम्मद यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। यह मामला कथित तौर पर पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से हवाला चैनलों के जरिए विदेशी फंडिंग प्राप्त करने और उसे जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी तथा विध्वंसक गतिविधियों में इस्तेमाल करने से जुड़ा है।

विशेष NIA न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 9 सितंबर 2026 को दिए आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से सभी सात आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह पैदा होता है। अदालत ने इन्हें PMLA की धारा 3 के तहत आरोपित करने और धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोप तय करने का निर्देश दिया।

“मैं निष्कर्ष निकालता हूं कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, जिसके आधार पर सातों आरोपियों—जहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, मेसर्स ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मोहम्मद यासीन मलिक, शबीर अहमद शाह, मसरत आलम और अब्दुल रशीद शेख—के खिलाफ मजबूत संदेह पैदा होता है। इसलिए इन आरोपियों पर PMLA की धारा 3 के तहत आरोप तय किया जाना चाहिए, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है।”

30 सितंबर को आरोप स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए आरोपियों की व्यक्तिगत पेशी तय थी। सुरक्षा कारणों से कुछ आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि न्यायिक हिरासत में आरोपियों से आरोप पत्र पर हस्ताक्षर करवाए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।

किन-किन पर आरोप तय होंगे

मामले में आरोपी निम्नलिखित हैं:

  • मोहम्मद यासीन मलिक (प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख)
  • जहूर अहमद शाह वटाली
  • नवल किशोर कपूर
  • मेसर्स ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड
  • शबीर अहमद शाह
  • मसरत आलम भट
  • अब्दुल रशीद शेख (इंजीनियर रशीद)

यासीन मलिक वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। मई 2022 में एक अन्य आतंकी फंडिंग मामले में उन्होंने NIA की विशेष अदालत के समक्ष आरोप स्वीकार किए थे और उन्हें आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने तथा UAPA के विभिन्न प्रावधानों के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

ED के आरोप और कथित रकम

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि अनुसूचित अपराधों से लगभग 8,94,87,639 रुपये (करीब 8.94 करोड़ रुपये) की अपराध से अर्जित संपत्ति उत्पन्न हुई। यह रकम आरोपियों द्वारा प्राप्त की गई, विभिन्न माध्यमों से रूट की गई, स्थानांतरित की गई, छिपाई गई, कब्जे में रखी गई या इस्तेमाल की गई।

ED के अनुसार आरोपियों ने पाकिस्तानी प्रतिष्ठान और अन्य स्रोतों से हवाला चैनलों के जरिए फंड प्राप्त किए। ये फंड विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से पहुंचाए गए और कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी तथा विध्वंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किए गए।

अदालत ने NIA की दूसरी पूरक आरोप पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यासीन मलिक को सऊदी अरब से 15,75,595 रुपये प्राप्त हुए। कुल मिलाकर मलिक पर आपराधिक गतिविधि से उत्पन्न 30,75,595 रुपये की विदेशी फंडिंग प्राप्त करने और उसे लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।

ED का यह मामला NIA द्वारा 2017 में दर्ज किए गए आतंकी फंडिंग मामले पर आधारित है। उस मामले में NIA ने IPC की धारा 120B, 121, 121A तथा UAPA की कई धाराओं का उल्लेख किया था। ED ने 14 जून 2017 को अपनी शिकायत दाखिल की थी।

जांच में क्या सामने आया

जांच एजेंसियों के अनुसार 2015-16 के वित्तीय वर्ष में जहूर अहमद शाह वटाली के परिसर से जब्त दस्तावेजों में विदेशी फंडिंग का विवरण मिला। इन दस्तावेजों के आधार पर यासीन मलिक, शबीर अहमद शाह और मसरत आलम को वटाली के माध्यम से विदेशी फंड मिलने का आरोप लगाया गया।

ED का कहना है कि यासीन मलिक से जुड़े ईमेल से पता चला कि उन्होंने विदेशों में फंड जुटाने का नेटवर्क बनाया था। यह पैसा JKLF को समर्थन देने तथा घाटी में अलगाववादी गतिविधियां और हिंसा फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया। कुछ आरोपों में पाकिस्तान हाई कमीशन से नकद कूरियर के जरिए हुर्रियत नेताओं तक पैसा पहुंचाने का भी उल्लेख है।

मामले की पृष्ठभूमि

2017 में NIA ने जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी, स्कूल जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हड़ताल-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए पाकिस्तान से फंडिंग का मामला दर्ज किया था। एजेंसी का आरोप था कि हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन समेत अलगाववादी नेता हवाला और अन्य अवैध माध्यमों से पैसा प्राप्त कर रहे थे।

यासीन मलिक उस मामले में भी आरोपी थे। 2022 में उन्होंने उस मामले में आरोप स्वीकार कर लिए थे। वर्तमान PMLA मामला उसी मूल मामले से उत्पन्न अपराध की संपत्ति से जुड़ा है। PMLA के तहत आरोप तय होना इस बात का संकेत है कि अदालत ने प्रथम दृष्टया सामग्री को पर्याप्त माना है। अब मामले में साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे और ट्रायल आगे बढ़ेगा।

आरोपियों को निर्दोष माने जाने का सिद्धांत लागू रहता है जब तक अदालत अंतिम फैसला न सुना दे। आरोप तय करने का आदेश केवल इस स्तर पर है कि मामला ट्रायल के योग्य है।

आगे की प्रक्रिया

30 अक्टूबर की सुनवाई में आरोप पत्र पर हस्ताक्षर और आगे की कार्यवाही पर विचार होने की संभावना है। चूंकि कई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं, सुरक्षा व्यवस्था के कारण उनकी पेशी सीमित रह सकती है।

यह मामला आतंक वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंध को रेखांकित करता है। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से घाटी में अलगाववादी गतिविधियों के लिए सीमा पार से आने वाले फंड पर नजर रखती रही हैं। अदालत का वर्तमान आदेश उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।

सभी तथ्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती आदेश, ED और NIA के आरोप पत्र तथा समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।

रवि कुमार यादव

गाँव और शहर दोनों की ज़िंदगी से जुड़े रहे हैं। परिवार में खेती-बाड़ी और मेहनत का माहौल रहा, जिससे उनमें जमीन से जुड़ाव बना। वे कम बोलते हैं, लेकिन ध्यान से सुनते हैं। यात्रा करना, स्थानीय मेलों में घूमना और पुराने दोस्तों से मिलना उनकी रुचि है। वे साधारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सम्मान की नजर से देखते हैं।

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