विश्वविद्यालयों में बनेंगे एनईपी सेल, हर सेमेस्टर की शुरुआत में होंगी कार्यशालाएं

उच्च शिक्षा मंत्री ने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिए निर्देश
रायपुर, 9 अक्टूबर। प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालयों में एनईपी सेल गठित किए जाएंगे। प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक नोडल अधिकारी और दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही, प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के हर सेमेस्टर की शुरुआत में कार्यशालाएं आयोजित होंगी। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली बैठक में ये निर्देश दिए।
बैठक में मंत्री वर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का लाभ तभी मिलेगा, जब इसका क्रियान्वयन कागजी निर्देशों और बैठकों तक सीमित न रहकर जमीन पर दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत और मुख्यमंत्री के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने में नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
रोजगार और उद्योगों से जोड़ने पर जोर
मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इसके लिए उद्योगपतियों, औद्योगिक घरानों और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से विद्यार्थियों को जोड़ने तथा उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पिछले दो वर्षों के दौरान नीति लागू करने में शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने आई व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा की गई। क्रेडिट प्रणाली और विषय चयन को लेकर विद्यार्थियों के बीच भ्रम दूर करने के लिए संभाग और जिला स्तर पर प्रशिक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और ब्रांड एंबेसडरों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण सत्र होंगे।
पाठ्यक्रम सरल बनाने और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सामान्य वैकल्पिक (जनरल इलेक्टिव) विषयों के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों को अधिक सरल, व्यावहारिक और लचीला बनाने पर जोर दिया गया। पाठ्यक्रमों में भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विरासत से जुड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री ने छठे सेमेस्टर में अनिवार्य इंटर्नशिप की व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने और उद्योगों तथा व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय स्थापित करने को कहा।



