छत्तीसगढ़

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान ट्रेन और मेट्रो रोके जाने पर गृह मंत्रालय को नोटिस

दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 9 अक्तूबर की सुनवाई में दिए गए आदेशों के कथित उल्लंघन पर प्रथम दृष्टया अवमानना (कंटेम्प्ट) का मामला बनता हुआ पाया है.

यह जानकारी कानूनी मामलों पर रिपोर्ट करने वाले लाइव लॉ ने दी है.

नौ अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी और कई विपक्षी दलों के अगले दिन होने वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली आने वाली ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं पर रोक लगाने के बजाय उन्हें नियंत्रित तरीके से चलाने का मौखिक निर्देश दिया था.

लाइव लॉ के मुताबिक़, सर्वोच्च अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह दिखाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार प्रस्तुत किए हैं कि अदालत के निर्देशों के बावजूद मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया, जिससे आदेशों का उल्लंघन हुआ हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीएमआरसी की अध्यक्ष डी. थारा को जवाब दाख़िल करने का निर्देश दिया है.

अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों से 13 अक्तूबर तक जवाबी हलफ़नामा और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. फ़िलहाल उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई में दाखिल जवाबों और अनुपालन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा.(bbc.com/hindi)

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