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बिहार के पतों पर 31 अफगानी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट जारी होने की रिपोर्ट, पुलिस मुख्यालय ने जांच के आदेश दिए

बिहार पुलिस मुख्यालय ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से मिली सूचना के आधार पर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, 31 संदिग्ध अफगानी नागरिकों ने बिहार के पतों का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट बनवाए हैं। इनमें से अधिकांश का पता पटना से जुड़ा है और एक का दरभंगा से। साथ ही दो बांग्लादेशी नागरिकों के भी बिहार के पतों पर भारतीय पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई है।

पटना: बिहार में विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय पासपोर्ट हासिल करने से जुड़ा मामला पुलिस मुख्यालय और प्रशासनिक स्तर पर जांच के दायरे में आ गया है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों और कई समाचार रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्रालय (MEA) तथा गृह मंत्रालय (MHA) से मिली सूचना के बाद यह बात सामने आई कि 31 संदिग्ध अफगानी नागरिकों ने बिहार के अलग-अलग पतों का हवाला देकर भारतीय पासपोर्ट बनवा लिए। इनमें से करीब 29 से 30 मामलों में पता पटना जिले का दर्ज है, जबकि एक मामला दरभंगा जिले से जुड़ा बताया गया है। इन पासपोर्टों का निर्गमन क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, पटना से हुआ है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस सहित अन्य रिपोर्टों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि MEA के निर्देशों के बाद जांच शुरू की गई है। अधिकारियों ने संवेदनशील जानकारी साझा करने से इनकार करते हुए कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और आवश्यक होने पर ही प्रासंगिक जानकारी दी जाएगी। ईटीवी भारत और जागरण की रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को पत्र भेजकर इन मामलों की जानकारी दी है।

संख्या और पतों का ब्योरा

विभिन्न रिपोर्टों में संख्या में मामूली अंतर है, जो जांच जारी रहने का संकेत देता है। कुछ रिपोर्टों में 31 संदिग्ध अफगानी नागरिकों का जिक्र है, जिनमें से 30 के पास अफगानी पासपोर्ट भी मौजूद बताए गए हैं। इनमें 29 का पता पटना और एक का दरभंगा दर्ज है। एक अन्य रिपोर्ट में 30 अफगानी नागरिकों के पटना के पते और एक के दरभंगा के पते का उल्लेख है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अधिकांश आवेदनों में पटना के अलग-अलग पते इस्तेमाल किए गए।

जागरण और दैनिक भास्कर की रिपोर्टों में कुछ नाम और पते भी सामने आए हैं। इनमें मोहम्मद अली खाकसर (पटना के पते पर मोहम्मद जमाल खान के नाम से) और इस्लाम शाह अशना (पटना सुपर मार्केट, बी ब्लॉक, फ्लैट नंबर 303, फ्रेजर रोड) जैसे मामलों का जिक्र है। एक संदिग्ध सलमान खान के नाम से खुद, पत्नी और सात बच्चों के लिए भारतीय पासपोर्ट जारी होने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, बच्चों को छोड़कर अधिकांश मामलों में पुलिस सत्यापन के बाद पासपोर्ट जारी हुए और फर्जी आधार या अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। विदेश मंत्रालय ने कथित आधार के आधार पर नागरिकता दिए जाने पर सवाल उठाया है।

दो बांग्लादेशी नागरिकों के मामले

अफगानी नागरिकों के अलावा दो बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा बिहार के पतों पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने की सूचना भी मिली है। दैनिक भास्कर और जागरण के अनुसार:

  • मुजफ्फरपुर में बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद बेलाल हसन भुइयां ने दीवान रोड (नगर थाना क्षेत्र) के पते पर मोहम्मद आफताब के नाम से पासपोर्ट बनवाया। स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि विशेष शाखा की जांच के दौरान वह गायब पाया गया और पहले भी स्थानीय पुलिस के संपर्क में रहा था।
  • खगड़िया में मो. उमर ने गांव मारर, थाना मोरकही के पते पर मो. उमर फारुख के नाम से भारतीय पासपोर्ट हासिल किया।

इन मामलों में नाम बदलकर दस्तावेज जमा करने और बड़े रैकेट के सक्रिय होने की आशंका व्यक्त की गई है। विस्तृत दस्तावेजी सबूत अभी जांच के अधीन हैं।

पुलिस मुख्यालय और जिला स्तर पर कार्रवाई

MEA और MHA की रिपोर्ट मिलने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारी (DM) तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP)/पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिए हैं। विशेष शाखा के पुलिस उपमहानिरीक्षक ने पटना, मुजफ्फरपुर और खगड़िया के DM तथा संबंधित SSP/SP से जांच रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को पासपोर्ट आवेदन, पते के दस्तावेज, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, पहचान पत्रों की सत्यता और संभावित बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल कर विधि सम्मत कार्रवाई करने तथा रिपोर्ट मुख्यालय भेजने को कहा गया है।

जांच का मुख्य फोकस यह रहेगा कि आवेदकों ने बिहार का पता किस आधार पर दिया, क्या वे वास्तव में उस पते पर रहते थे, कौन-से दस्तावेज संलग्न किए गए और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया में कोई चूक हुई या नहीं। यदि पता वास्तविक निवास से मेल नहीं खाता तो सहयोगियों और नेटवर्क की भूमिका भी देखी जाएगी।

संदर्भ और प्रक्रिया

भारतीय पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस सत्यापन अनिवार्य होता है, जिसमें स्थानीय पता और दस्तावेजों की जांच होती है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, पटना बिहार के सभी जिलों के आवेदनों को संभालता है। पिछले वर्षों में भी पटना में अफगानी मूल के व्यक्तियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट या पहचान पत्र बनवाने के अलग-अलग मामले रिपोर्ट हुए हैं, जिनमें फ्रेजर रोड क्षेत्र के पते का जिक्र आया था। वर्तमान मामला अभी प्रारंभिक जांच चरण में है और अदालती पुष्टि या अंतिम कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को विस्तृत सूची या व्यक्तिगत विवरण साझा करने से इनकार किया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने मामलों में दस्तावेजी अनियमितता साबित होती है और किन धाराओं के तहत कार्रवाई होती है। संबंधित मंत्रालयों और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय जारी है।

यह रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय सूत्रों, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से संबंधित पत्र की मीडिया कवरेज तथा न्यू इंडियन एक्सप्रेस, जागरण, दैनिक भास्कर और ईटीवी भारत (30 सितंबर-1 अक्टूबर 2026) की खबरों पर आधारित है। आंकड़ों में रिपोर्टों के बीच हल्का अंतर है, जिसे जांच के अंतिम निष्कर्ष से स्पष्ट किया जाएगा।

अजय यादव

एक सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति हैं। बचपन से ही अपने आसपास की बातों को याद रखने की आदत रही। परिवार में बड़ों का आदर और मेहनत की सीख मिली। वे सड़कों पर घूमना, बस-स्टैंड और बाजार की हलचल देखना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि असली तस्वीर वही है जो आम दिन में दिखती है, किसी मंच पर नहीं।

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