छत्तीसगढ़

अमेरिका के साथ डीजल डील के बाद रूस का यूक्रेन पर हमला

डॉयचे वैले पर अविनाश द्विवेदीकी रिपोर्ट

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने नए हमलों में 12 यूक्रेनी नागरिकों की मौत के बाद अमेरिका और रूस के बीच हुए डीजल समझौते को आड़े हाथों लिया है.

यूक्रेन के दक्षिणी जापोरिज्जिया क्षेत्र में शनिवार को हुए रूसी हवाई हमलों में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई. इनमें तीन बच्चे भी शामिल थे. इस हमले में कम से कम 16 लोग घायल हुए हैं. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक रूसी ग्लाइड बम रिहायशी इमारतों पर गिरे, जिससे कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं. शनिवार को राजधानी कीव पर भी मिसाइल हमले किए गए. इसके बाद राजधानी के कई इलाकों में बिजली जाने और कई लोगों के घायल होने की खबर है. पिछले कुछ दिनों से रूस ने यूक्रेन पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं और लगातार बढ़ती मौतों के बीच यह हमला युद्ध के सबसे संवेदनशील पलों में से एक माना जा रहा है.

इन हमलों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका और रूस के बीच हुए नए डीजल समझौते को निशाने पर लिया. जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने डीजल निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील मिलने का शुक्रिया जापोरिज्जिया में रिहायशी इमारतों पर बम गिराकर अदा किया है. उनके मुताबिक मॉस्को हर नरमी को इस संकेत की तरह देखता है कि वह बिना कोई अतिरिक्त कीमत चुकाए युद्ध जारी रख सकता है. जेलेंस्की ने कहा कि रूस को अलग संदेश देने की जरूरत है, ऐसा संदेश जो उसे यह समझाए कि उसकी आक्रामकता से उसका नुकसान बढ़ेगा, कम नहीं होगा.

चर्चा में अमेरिका-रूस की डीजल डील
जेलेंस्की की यह प्रतिक्रिया उस घोषणा के कुछ घंटे बाद आई जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस के साथ डीजल आपूर्ति समझौते का ऐलान किया था. ट्रंप के मुताबिक रूस अमेरिका को तुरंत तीन लाख टन से ज्यादा डीजल की आपूर्ति करेगा. इसके बाद नवंबर में अतिरिक्त पांच लाख टन डीजल भेजा जाएगा और फिर उसके बाद और बड़ी खेपें वैश्विक बाजार में उतारी जाएंगी. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अमेरिका रूसी डीजल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने जा रहा है. रूस ने भी इस समझौते की पुष्टि की है.

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस कदम का मकसद ईंधन बाजार को राहत देना है. अमेरिका में अगले महीने मिडटर्म चुनाव होने हैं और पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं. फरवरी में शुरू हुए अमेरिका-इस्राएल और ईरान तनाव के बाद ऊर्जा बाजार में दबाव बढ़ा है, जिसका असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ा है. व्हाइट हाउस के सामने कीमतें नियंत्रित रखने की चुनौती है और इसी पृष्ठभूमि में डीजल समझौते को देखा जा रहा है. हालांकि कई ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी डीजल की इस आपूर्ति से कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना कम ही है.

रूस को मिलेंगे लंबी लड़ाई के अतिरिक्त संसाधन
यूक्रेन का तर्क है कि यह मामला सिर्फ ईंधन कीमतों का नहीं है. देश को डर है कि डीजल निर्यात से रूस को मिलने वाली अतिरिक्त कमाई युद्ध मशीन को मजबूत करेगी. जेलेंस्की ने कहा कि यह फैसला रूस के हित में जाता है और उसे लड़ाई लंबी खींचने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करा सकता है. यूक्रेनी नेतृत्व अब अपने सहयोगी देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहा है और उन विकल्पों पर चर्चा कर रहा है जिनसे रूस को मिलने वाली अतिरिक्त आय का असर कम किया जा सके.

इस पूरे घटनाक्रम पर जर्मनी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. बर्लिन ने शनिवार को साफ कर दिया कि वह रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों पर कायम रहेगा. जर्मन सरकार के प्रवक्ता श्टेफान कोर्नेलियुस ने कहा कि जर्मनी रूस पर प्रतिबंधों के फैसलों के साथ खड़ा है और यूरोपीय साझेदारों के साथ नए प्रतिबंधों की दिशा में भी काम कर रहा है. उन्होंने यह भी दोहराया कि यूक्रेन को जर्मनी का समर्थन पहले की तरह जारी रहेगा और बर्लिन की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.

जर्मनी ने किया रूस पर यूरोपीय प्रतिबंधों का समर्थन
जर्मनी के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने भी अमेरिकी फैसले से दूरी बनाते हुए कहा कि देश बिना किसी शर्त के यूरोपीय प्रतिबंध पैकेजों का समर्थन करता है. मंत्रालय के अनुसार जर्मनी अब रूस से तेल या पेट्रोलियम उत्पाद नहीं खरीदता. सरकार का कहना है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बड़े बदलाव किए गए हैं और अब देश रूसी तेल पर निर्भर नहीं है. बर्लिन के मुताबिक उसकी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित है और आपूर्ति को लेकर कोई जोखिम नहीं है.

डीजल समझौते ने पश्चिमी देशों की रूस नीति के भीतर मौजूद मतभेदों को भी सामने ला दिया है. एक तरफ अमेरिका घरेलू ईंधन कीमतों के दबाव में सीमित राहत देने की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ यूरोपीय देश अब भी ऊर्जा प्रतिबंधों को रूस पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी तरीका मानते हैं. ऐसे में यह समझौता सिर्फ व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिमी गठबंधन की एकजुटता से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है.

अमेरिकी फैसले से यूक्रेनी आहत
कीव में भी इस फैसले को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है. युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में बने स्मारकों पर पहुंचे कई लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईंधन की कीमतों को युद्ध से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि अमेरिकी चुनावी राजनीति के कारण लिया गया फैसला रूस को आर्थिक राहत देगा. वहीं कुछ यूक्रेनियों ने कहा कि उन्हें यह फैसला हैरान नहीं करता, क्योंकि वे लंबे समय से ट्रंप के रूस को लेकर रुख पर सवाल उठाते रहे हैं.

आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि डीजल समझौते का असर ईंधन बाजार पर कितना पड़ता है. लेकिन अभी के लिए यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों का मानना है कि इससे कहीं ज्यादा अहम सवाल यह है कि क्या इससे रूस की युद्ध क्षमता और बढ़ेगी.

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