छत्तीसगढ़

संघ प्रमुख मोहन भागवत को प्रदान किया ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’, डोंगरगढ़ की समिति देती है सम्मान

डोंगरगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को वर्ष 2026 का ‘महाकवि आचार्य विद्यासागर अलंकरण’ प्रदान किया गया है। विद्यासागरोदय विद्यायतन समाधि स्मारक समिति, डोंगरगढ़ की ओर से इस अलंकरण का आयोजन किया जाता हैं।

समिति के विनोद बडजात्या के अनुसार, भोपाल में आयोजित समारोह में आरएसएस चीफ भागवत को राष्ट्रव्यापी सेवाओं और राष्ट्र जागरण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह अलंकरण वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य आचार्य विद्यासागर महाराज के विचारों और सेवा के संदेश को लोगों तक पहुंचाना है।

आचार्य विद्यासागर महाराज के 50वें आचार्य पदारोहण वर्ष 2021-22 के अवसर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर में इस सम्मान की शुरुआत की गई थी। इस सम्मान के तहत चयनित व्यक्ति या संस्था को सोने-चांदी से निर्मित विशेष पदक, प्रशस्ति पत्र और एक लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। यह सम्मान मानव सेवा, राष्ट्रीय सेवा, विश्व शांति, शाकाहार के प्रचार, जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वालों को दिया जाता है।

समिति की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2021 में पहला अलंकरण उद्योगपति अशोक पाटनी को दिया गया था। उन्हें बाढ़ प्रभावित गरीब परिवारों के लिए मकान बनवाने, विधवा महिलाओं को पेंशन देने और गरीब बच्चों की पढ़ाई में मदद करने जैसे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया था। वर्ष 2022 में यह सम्मान लोकबिरादरी प्रकल्प के प्रणेता डॉ. प्रकाश आमटे को दिया गया। डॉ. आमटे और उनकी पत्नी डॉ. मंदाकिनी आमटे आदिवासी समाज की सेवा और जीवों की देखभाल के लिए जाने जाते हैं।

वर्ष 2023 में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले कैलाश मानव को इस अलंकरण से सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 में गोवंश की रक्षा और पशु सेवा के लिए काम करने वाली दयोदय महासंघ, भोपाल को यह सम्मान दिया गया। समिति के अनुसार, यह संस्था मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 100 से अधिक गौशालाओं का संचालन करती है। इन गौशालाओं के माध्यम से एक लाख से अधिक निराश्रित, घायल और बीमार पशुओं को बचाने का दावा किया गया है। इस वर्ष सम्मान समारोह रायपुर में आयोजित हुआ था। अब वर्ष 2026 में मोहन भागवत को इस अलंकरण से सम्मानित किया गया है।

समिति की विज्ञप्ति के अनुसार, भोपाल में आयोजित समारोह आचार्य समयसागर महाराज के आशीर्वाद, सानिध्य और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर से संतों, विद्वानों और गणमान्य नागरिकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। डोंगरगढ़ की विद्यासागरोदय विद्यायतन समाधि स्मारक समिति शिक्षा, साहित्य, सेवा और संस्कार के क्षेत्र में भी काम कर रही है। समिति इस अलंकरण के जरिए आचार्य विद्यासागर महाराज के अहिंसा, करुणा, संयम और ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

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