कलेक्टर की कुर्सी से अब तक दूर सुखनाथ अहिरवार! जूनियर IAS संभाल रहे जिलों की कमान, आखिर कब खुलेगा इंतजार का ताला?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर एक सवाल चर्चा का विषय बन सकता है कि राज्य के खेल एवं युवा कल्याण विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थ 2016 बैच के आईएएस अधिकारी सुखनाथ अहिरवार को आखिर जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी कब सौंपी जाएगी? प्रशासनिक गलियारों में अधिकारियों की वरिष्ठता, अनुभव और पदस्थापना को लेकर होने वाली चर्चाओं के बीच यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनसे जूनियर बैच के कई अधिकारियों को जिलों की कमान संभालने का अवसर मिल चुका है। ऐसे में अहिरवार की प्रशासनिक पारी में कलेक्टर पद की जिम्मेदारी कब जुड़ेगी, इस पर निगाहें टिकना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी अधिकारी की कलेक्टर के रूप में नियुक्ति केवल बैच या वरिष्ठता के आधार पर तय नहीं होती, बल्कि राज्य सरकार की प्रशासनिक जरूरतों, उपलब्ध पदों और विभिन्न परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।सुखनाथ अहिरवार छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की सिविल सूची में उनकी पदस्थापना खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव के रूप में दर्ज है। उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वे इससे पहले कांकेर में अपर कलेक्टर के पद पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। नवंबर 2025 में जारी प्रशासनिक फेरबदल से संबंधित समाचारों में भी उनका नाम खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव के रूप में सामने आया था।यहीं से यह सवाल उठता है कि प्रशासनिक सेवा में अनुभव हासिल करने के बाद भी उन्हें अब तक जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी क्यों नहीं मिली है? क्या राज्य सरकार की भावी प्रशासनिक योजनाओं में उनके लिए किसी जिले की कमान संभालने का अवसर सुरक्षित है, या फिलहाल उन्हें विभागीय जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए ही उपयुक्त माना जा रहा है? इन सवालों का जवाब सरकार के आधिकारिक निर्णय से ही मिल सकता है। फिलहाल ऐसी किसी निश्चित समयसीमा की सार्वजनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि अहिरवार को कब और किस जिले का कलेक्टर बनाया जाएगा।छत्तीसगढ़ में कलेक्टरों की नियुक्ति और तबादलों के दौरान अलग-अलग बैच के अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है। अप्रैल 2025 में राज्य सरकार ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल के दौरान 41 आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया था और 11 जिलों में नए कलेक्टर नियुक्त किए थे। इस सूची में विभिन्न बैचों के अधिकारियों को जिला प्रशासन की कमान सौंपी गई थी। यह घटनाक्रम बताता है कि कलेक्टर की नियुक्ति में केवल बैच ही निर्णायक कारक नहीं होता, बल्कि सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताएं भी अहम भूमिका निभाती हैं।हालांकि, किसी अधिकारी को कलेक्टर बनाने का अवसर कब मिलेगा, यह सवाल उसकी वरिष्ठता के साथ-साथ अब तक की प्रशासनिक जिम्मेदारियों और राज्य सरकार के भरोसे से भी जुड़ता है। जिला कलेक्टर का पद केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि जिले में शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था से जुड़े समन्वय, राजस्व प्रशासन, जनशिकायतों के निराकरण और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी को सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने के साथ-साथ आम जनता की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होता है।ऐसे में सुखनाथ अहिरवार को कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा को केवल इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए कि उनसे जूनियर अधिकारी जिलों में पदस्थ हो चुके हैं। असली प्रश्न यह है कि राज्य सरकार अधिकारियों की जिम्मेदारियों का निर्धारण किन मानकों पर कर रही है और क्या आने वाले प्रशासनिक फेरबदल में अहिरवार को जिला प्रशासन का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा? यदि सरकार उन्हें किसी जिले की कमान सौंपती है, तो उनके लिए विभागीय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर प्रत्यक्ष जिला प्रशासन का अनुभव हासिल करने का अवसर होगा। वहीं, यदि उन्हें फिलहाल वर्तमान पद पर ही रखा जाता है, तो उसके पीछे के प्रशासनिक कारणों को समझने के लिए आधिकारिक आदेश और सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।राज्य की नौकरशाही में अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर होने वाली चर्चाएं लोकतांत्रिक प्रशासन का स्वाभाविक हिस्सा हैं। लेकिन किसी अधिकारी को अवसर मिलने या नहीं मिलने के पीछे व्यक्तिगत उपेक्षा, पक्षपात अथवा किसी विशेष कारण का निष्कर्ष बिना प्रमाण के निकालना उचित नहीं होगा। इसी तरह, जूनियर अधिकारियों को कलेक्टर बनाए जाने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि वरिष्ठ अधिकारी की अनदेखी की गई है। फिर भी, जब एक अधिकारी लंबे समय तक विभागीय जिम्मेदारियों में बना रहता है और उसके बैच के अन्य अधिकारियों को जिला प्रशासन का नेतृत्व करने का अवसर मिलता है, तब उसकी भावी पदस्थापना को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।अब निगाहें छत्तीसगढ़ सरकार के आगामी प्रशासनिक फेरबदल पर रहेंगी। क्या 2016 बैच के आईएएस अधिकारी सुखनाथ अहिरवार को भी किसी जिले की कमान सौंपकर कलेक्टर के रूप में काम करने का अवसर दिया जाएगा, या खेल एवं युवा कल्याण विभाग में उनकी वर्तमान जिम्मेदारी ही आगे जारी रहेगी? इसका उत्तर भविष्य के सरकारी आदेशों में ही सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कलेक्टर पद को लेकर उनके नाम पर उठने वाला सवाल प्रशासनिक पदस्थापनाओं में अवसर, अनुभव और सरकार की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन की चर्चा को सामने लाता है।बड़ा सवाल यही है—जब जूनियर बैच के अधिकारियों को जिलों की कमान मिल चुकी है, तो 2016 बैच के आईएएस सुखनाथ अहिरवार की कलेक्टर पद पर पदस्थापना का इंतजार कब खत्म होगा?
