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सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका ले गई बच्ची को चार हफ्ते में भारत लाने का आदेश दिया, पिता के माता-पिता पर लुकआउट सर्कुलर बहाल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक नाबालिग बच्ची की मां के पक्ष में अहम आदेश देते हुए पिता को अंतिम अवसर दिया है कि वह चार हफ्ते के भीतर बच्ची को अमेरिका से भारत लाए। कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि पिता इस आदेश का पालन नहीं करता, तो भारत में मौजूद उसके माता-पिता को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश उस मामले में सुनाया, जिसमें पिता अपनी साढ़े तीन साल की बेटी को पत्नी को बिना बताए चुपके से अमेरिका ले गया था और उसे भारत वापस लाने से इनकार कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि मां लगातार बेटी को वापस पाने की कोशिश कर रही है और उसकी स्थिति दयनीय है। पीठ ने यह भी कहा कि उसे यह नहीं पता कि कामकाजी पिता के साथ अमेरिका में बच्ची किन हालात में रह रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पिता के माता-पिता के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को रद्द किया गया था। इस तरह उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर फिर से प्रभावी हो गया है। लुकआउट सर्कुलर के तहत संबंधित व्यक्ति की यात्रा पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर उसे रोका भी जा सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पिता के माता-पिता चुपके से देश छोड़कर न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

पीठ ने कहा कि उसने पिता को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि उसे चार हफ्ते के भीतर बच्ची के साथ अमेरिका से भारत आना होगा, नहीं तो उसके माता-पिता को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। कोर्ट ने माता-पिता को यह बात उनकी भाषा में भी समझाई। यदि पिता खुद भारत नहीं आना चाहता, तो उसे एस्कॉर्ट के साथ बच्ची को विमान में भेजने का इंतजाम करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मां अमेरिका पहुंचती है, तो पिता को बच्ची उसे सौंपनी होगी।

आदेश में कोर्ट ने कहा कि यह फैसला बच्ची के हित को ध्यान में रखकर किया गया है। बच्ची को पिता ने धोखे से तब ले जाया था, जब उसकी उम्र महज साढ़े तीन साल थी। कोर्ट ने सवाल किया कि बच्ची को अपनी मां के प्यार, देखभाल और स्नेह से क्यों वंचित किया जाए और पिता बेटी के साथ अमेरिका में क्यों रुका रहे। मामले की अगली सुनवाई एक महीने बाद होगी।

यह आदेश उन मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को दिखाता है, जिनमें कोई अभिभावक बच्चे को दूसरे देश ले जाकर लौटाने से इनकार करता है और भारत में मौजूद परिवार के सदस्य न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश करते हैं।

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