चिटफंड कंपनियों के नाम पर करोड़ों की ठगी, दो मामलों में तीन आरोपियों को 10 साल तक की सजा

छत्तीसगढ़ संवाददाता
जांजगीर-चांपा, 7 नवंबर। निवेश की रकम कम समय में दोगुनी करने और हर महीने मोटा मुनाफा देने का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठने वाले चिटफंड कारोबारियों के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। जांजगीर की विशेष अदालत ने धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इनमें दो आरोपियों को 10-10 साल और एक आरोपी को भी 10 साल तक की सजा दी गई है। दोनों मामलों में सरकारी पैरवी अधिवक्ता संदीप सिंह बनाफर ने की।
पहले मामले में आरोपियों ने आरआरके पब्लिक बाजार प्रालि के नाम पर कारोबार और निवेश योजना का प्रचार कर लोगों से रकम जमा कराई थी। शिकायतकर्ता डिकेश्वर प्रसाद साहू ने जनवरी से जून 2024 के बीच कुल 23.50 लाख रुपये निवेश किए थे। इसमें उनके स्वयं के 12.50 लाख और गरीबदास महंत के 11 लाख रुपये शामिल थे। कंपनी में निवेश पर हर महीने 12.5 प्रतिशत रिटर्न देने का भरोसा दिलाया गया था।
जांच के बाद आरोपी नूरजहां बेगम (40) और राजन रत्न कुजूर (40) के खिलाफ मामला अदालत पहुंचा। विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने दोनों को आईपीसी की धारा 420/34 के तहत सात साल कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना तथा छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत 10 साल कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
दूसरे मामले में विनायक होम्स रियल एस्टेट कंपनी के संचालकों ने 6.5 साल में रकम दोगुनी करने का झांसा दिया था। शिकायतकर्ता रामकिशुन यादव ने 2013 और 2015 में तीन-तीन लाख रुपये की एफडी कराई थी। अवधि पूरी होने पर कंपनी का कार्यालय बंद मिला और निवेश की रकम वापस नहीं की गई।
मामले में अदालत ने आरोपी फूलचंद बिशे (72) को आईपीसी की धारा 420 में सात साल, प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स प्रतिबंध अधिनियम की धाराओं 4 और 5 में क्रमशः तीन और दो साल तथा निक्षेपकों के हितों के संरक्षण अधिनियम की धारा 10 में 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। अलग-अलग धाराओं में कुल दो लाख आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।



