छत्तीसगढ़

संजू त्रिपाठी हत्याकांड में 22 आरोपियों की रिहाई को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी एसएसपी ने अभियोजन अधिकारी को पत्र लिखा

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 7 नवंबर। हिस्ट्रीशीटर संजू त्रिपाठी हत्याकांड में सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ पुलिस अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। पुलिस का दावा है कि मामले में हथियारों की बरामदगी, बैलिस्टिक रिपोर्ट, बैंक लेनदेन, मोबाइल कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज सहित कई अहम साक्ष्य जुटाए गए थे। एसएसपी रजनेश सिंह ने 5 नवंबर को जिला अभियोजन कार्यालय को पत्र लिखकर शासन की ओर से अपील की तैयारी करने को कहा है।

सकरी थाने में दर्ज इस हत्याकांड की सुनवाई दसवें अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत में हुई थी। अदालत ने 30 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120-बी, 109 और 34 तथा आर्म्स एक्ट की धाराओं 25 और 27 के तहत विचाराधीन था।

संजू उर्फ प्राणनाथ त्रिपाठी की 14 दिसंबर 2022 को सकरी बाइपास स्थित खनिज बैरियर के पास दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह अपनी एमजी हेक्टर कार से जा रहे थे, तभी हमलावरों ने उनकी गाड़ी रोककर गोलियां चलाई थीं। पुलिस ने हत्या के पीछे पारिवारिक और संपत्ति विवाद को वजह बताते हुए साजिश का आरोप लगाया था। अदालत ने 30 अक्टूबर 2026 को मुख्य आरोपी कपिल त्रिपाठी सहित सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया।

एसएसपी ने अभियोजन कार्यालय को भेजे दो पेज के पत्र में पुलिस की जांच और जुटाए गए साक्ष्यों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। इसमें दो पिस्टल, 10 कारतूस, हथियारों की जांच रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले धातु के टुकड़ों की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं।

इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, चैट, लोकेशन और रिकॉर्डिंग के साथ 6.15 लाख रुपये के बैंक लेनदेन का विवरण भी दिया गया है। पुलिस ने थार, स्कॉर्पियो, स्विफ्ट डिजायर और एक्टिवा सहित वाहनों से जुड़े दस्तावेजों तथा हथियारों की आपूर्ति के संबंध में आरोपियों के बयान का भी उल्लेख किया है।

पत्र में 30 से अधिक स्वतंत्र और पुलिस गवाहों के नाम भी शामिल किए गए हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी जय नारायण त्रिपाठी और मृतक के बीच पारिवारिक संबंधों तथा संपत्ति विवाद से जुड़े साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है।

एसएसपी रजनेश सिंह का कहना है कि मामले में तकनीकी, भौतिक और मौखिक साक्ष्य पर्याप्त हैं। ऐसे में आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देना जरूरी है। पुलिस अब अभियोजन कार्यालय के माध्यम से शासन की ओर से हाईकोर्ट में अपील की तैयारी कर रही है।

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