छत्तीसगढ़

सड़क हादसे में मौत पर एक करोड़ के मुआवजा आदेश के खिलाफ अपील में 13 माह की देरी

पंजाब रोडवेज पर 38 हजार रुपये कास्ट, लगाया सुनवाई से पहले 50 प्रतिशत मुआवजा राशि जमा करने की शर्त

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 13 अक्टूबर। सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिजनों को दिए गए एक करोड़ नौ हजार 60 रुपये के मुआवजे के आदेश को चुनौती देने में पंजाब रोडवेज की ओर से 389 दिन की देरी की गई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देरी माफ करते हुए अपील सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली, लेकिन बस कंपनी पर 38,000 का कास्ट भी लगाया है। कोर्ट ने साफ किया कि मुआवजे की बाकी रकम की वसूली पर रोक तभी प्रभावी होगी, जब कंपनी 30 दिन के भीतर कुल मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करेगी।

मामला 14 अक्टूबर 2019 को हुए सड़क हादसे का है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 22 फरवरी 2025 को मृतक के परिजनों को एक करोड़ से अधिक राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस रकम पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देय है।

बस के मालिक की ओर से 22 जून 2026 को हाईकोर्ट में अपील दायर की गई, जिसमें 389 दिन की देरी हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गौर किया कि मुआवजे का आदेश होने के बावजूद दावेदारों को अब तक एक पैसा भी नहीं मिला है।

जस्टिस संजय कुमार जायसवाल ने अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कर दिया और मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किया। हालांकि, देरी और मुआवजा जमा नहीं किए जाने की स्थिति को देखते हुए कंपनी पर 38,000 का कास्ट लगाया गया है।

कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह 30 दिन के भीतर दावा अधिकरण के समक्ष दावेदारों में से एक के नाम 38,000 का चेक जमा करे।

अंतरिम राहत की मांग पर हाईकोर्ट ने कंपनी को 30 दिन के भीतर कुल मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करने का आदेश दिया है। इस शर्त का पालन होने पर ही शेष राशि की वसूली पर रोक लागू होगी।

दावेदार जमा की गई रकम निकाल सकेंगे, लेकिन उन्हें लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि कोर्ट के निर्देश पर जरूरत पड़ने पर वे यह राशि वापस करेंगे।

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