पांच साल के बच्चे की मां पर अपहरण की एफआईआर क्यों?

हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाते हुए पुलिस से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 13 अक्टूबर। अपने ही पांच साल के बच्चे की मां रोशनी सोनी के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि किन परिस्थितियों में मां के खिलाफ अपहरण का अपराध दर्ज किया गया और बच्चे की कस्टडी शिकायतकर्ता को कैसे सौंपी गई। फिलहाल कोर्ट ने मामले में आगे की आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
बिलासपुर के मंगला स्थित दीनदयाल कॉलोनी निवासी रोशनी सोनी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि वह बच्चे की जैविक मां और प्राकृतिक अभिभावक है। पुलिस ने बच्चे को उसकी कस्टडी से लिया था। ऐसे में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 137(2) के तहत उसके खिलाफ अपहरण का अपराध प्रथम दृष्टया नहीं बनता।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि एफआईआर के अनुसार, मां ने खुद बच्चे को शिकायतकर्ता आकाश सर्वगोड के सुपुर्द किया था। बाद में बच्चे के अपहरण की बात सामने आने पर शुरुआत में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सरकार ने याचिकाकर्ता के तर्कों का विरोध किया।
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की बेंच ने पूरे घटनाक्रम पर पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को केस डायरी पेश करने और संबंधित पुलिस अधिकारी को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। हेड कांस्टेबल संगीता नेताम और आकाश सर्वगोड को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने सरकंडा थाने में दर्ज एफआईआर और 29 अक्टूबर 2025 को दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने संबंधी आदेश और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बिलासपुर में लंबित आपराधिक प्रकरण नंबर में अगली सुनवाई तक आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने अभी एफआईआर को निरस्त नहीं किया है। कोर्ट ने फिलहाल कार्यवाही पर रोक लगाकर पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि बच्चे की कस्टडी और अपहरण के आरोप से जुड़ी कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई।



