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लद्दाख के 28 स्थानों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र पर मानक नाम दिए गए, गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026: केंद्र सरकार ने लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन से परामर्श के बाद लद्दाख के 28 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र पर मानक नामों से चिह्नित किया है। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं, जो 2020 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध के दौरान घर्षण बिंदु रहे थे।

गृह मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कदम इन स्थानों की सटीक पहचान आसान बनाने और आम लोगों में बेहतर जागरूकता पैदा करने के लिए उठाया गया है। अद्यतन मानचित्र सर्वे ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध है। यह पहल अरुणाचल प्रदेश में अगस्त 2026 में किए गए इसी तरह के अभ्यास के बाद हुई है, जिसमें 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के नाम मानकीकृत किए गए थे।

सरकारी सूची में गोगरा को भू-क्षेत्र और हॉट स्प्रिंग को जल निकाय के रूप में दर्ज किया गया है। पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में पैंगोंग झील क्षेत्र में हुई झड़प के बाद बढ़ा था। उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, गोगरा से अगस्त 2021 में और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स (पेट्रोल पॉइंट-15) से सितंबर 2022 में सैनिकों की वापसी हुई थी। आधिकारिक बयान में सीमा रेखा में किसी बदलाव या सैन्य तैनाती से जुड़े किसी नए फैसले का उल्लेख नहीं है।

पहचाने गए 28 स्थानों और विशेषताओं में चोटियाँ, पर्वत, दर्रे, ग्लेशियर, घाटी, नदी, झील, भू-क्षेत्र और जल निकाय शामिल हैं। सूची इस प्रकार है:

  • अतीशा गिरी (चोटी)
  • ब्रांगसा (भू-क्षेत्र)
  • चैपचिंगल पास (दर्रा)
  • कनिष्क पीक (चोटी)
  • करुण पीर (पर्वत)
  • कुकसेल (भू-क्षेत्र)
  • मार्तंड गिरी (चोटी)
  • पारपिक (ग्लेशियर)
  • स्कमरी ग्लेशियर (ग्लेशियर)
  • शचमिरक पास (दर्रा)
  • श्कोर्गा वैली (घाटी)
  • जोरावर पीक (चोटी)
  • देहरा कंपास (भू-क्षेत्र)
  • द्रक कार्पो (पर्वत)
  • गोगरा (भू-क्षेत्र)
  • जोलमोरी (पर्वत)
  • कुमारायण पॉइंट (भू-क्षेत्र)
  • पांगलुंग (भू-क्षेत्र)
  • रिनचेन जांगपो (चोटी)
  • शाक्यश्री गिरी (चोटी)
  • गुरु रिनपोचे (झील)
  • शामल लुंगपा (भू-क्षेत्र)
  • यांगपा नदी (नदी)
  • हॉट स्प्रिंग (जल निकाय)
  • मार्पा लोत्सवा री (चोटी)
  • मिलारेपा कांगरी (चोटी)
  • शिव री (चोटी)
  • महेश्वरा री (चोटी)

शामल लुंगपा को 1950 के दशक में गश्त और स्टेजिंग मार्ग से जुड़ा बताया गया है। सरकार का कहना है कि मानक नामों के इस्तेमाल से आधिकारिक रिकॉर्ड में एकरूपता आएगी और संवेदनशील सीमा क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं की पहचान स्पष्ट होगी।

नवीन कुमार

झारखंड के परिवेश से जुड़े रहे हैं। पहाड़, जंगल और छोटे कस्बों की जिंदगी उन्होंने करीब से देखी है। परिवार में सादगी और मेहनत का मूल्य सिखाया गया। वे लोगों से मिलना, उनकी बात सुनना और स्थानीय मेलों-त्योहारों में शामिल होना पसंद करते हैं। उनकी पहचान सीधेपन और जमीन से जुड़े रहन-सहन से है।

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