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सिंगापुर से लौटे विकास शील और सुबोध कुमार सिंह—चमक मुख्यमंत्री की, पर्दे के पीछे प्रशासनिक मशीनरी की भूमिका पर सवाल।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सिंगापुर यात्रा से लौटे प्रतिनिधिमंडल के साथ अब राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा निवेश प्रस्तावों की हो रही है। चार दिवसीय यात्रा के दौरान राज्य को लगभग ₹43,600 करोड़ के विदेशी निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें ₹41,750 करोड़ के AI-ready डेटा सेंटर, ₹1,500 करोड़ के सौर ऊर्जा एवं बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट और ₹350 करोड़ के एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग तथा एक्सपोर्ट हब का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही कौशल विकास के क्षेत्र में ITE Education Services के साथ समझौता भी हुआ है।स्वाभाविक रूप से इन उपलब्धियों का राजनीतिक और सार्वजनिक श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को मिलना चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं को प्रस्तुत करने और निवेशकों से संवाद करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने निभाई। लेकिन किसी भी बड़े सरकारी निवेश अभियान की सफलता केवल मंच पर दिखाई देने वाले चेहरे की कहानी नहीं होती। उसके पीछे नीति, प्रशासनिक तैयारी, निवेश प्रस्तावों का समन्वय, विभागों के बीच तालमेल, बैठकों की रूपरेखा और संभावित निवेशकों के साथ लगातार संवाद जैसी पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया काम करती है।यहीं मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की भूमिका को देखने की जरूरत पैदा होती है।सिंगापुर यात्रा से पहले ही स्पष्ट था कि मुख्यमंत्री के साथ जाने वाले उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह शामिल रहेंगे। यह महज औपचारिक उपस्थिति नहीं मानी जा सकती, क्योंकि मुख्यमंत्री की अंतरराष्ट्रीय निवेश यात्रा में मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी प्रशासनिक मशीनरी और विभागों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी होता है, जबकि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव का दायित्व मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं को प्रशासनिक और रणनीतिक स्तर पर आगे बढ़ाने से जुड़ा रहता है।सिंगापुर में मुख्यमंत्री की विभिन्न बैठकों में दोनों अधिकारी मौजूद रहे। Gardens by the Bay के साथ हुई बैठक में भी मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की उपस्थिति दर्ज हुई। इसी तरह Singapore Business Federation के नेतृत्व रात्रिभोज में भी दोनों अधिकारी मौजूद थे, जहां अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद हुआ।इसका अर्थ यह नहीं कि ₹43,600 करोड़ के प्रत्येक निवेश प्रस्ताव का श्रेय व्यक्तिगत रूप से इन दोनों अधिकारियों को दिया जाए। निवेश किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं होता। लेकिन यह सवाल जरूर उठना चाहिए कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जब राज्य का इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने जाता है, तो उसके पीछे प्रशासनिक स्तर पर कौन तैयारी करता है, कौन विभागों को एक सूत्र में बांधता है और मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले निवेश एजेंडे को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है?मुख्य सचिव विकास शील की भूमिका इसी व्यापक प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दिखाई देती है। राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी के शीर्ष पर होने के कारण निवेश, उद्योग, कौशल विकास, ऊर्जा, तकनीक और अधोसंरचना जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को एक साझा आर्थिक एजेंडे से जोड़ना मुख्य सचिव स्तर की जिम्मेदारी का हिस्सा है। सिंगापुर यात्रा में निवेश के साथ-साथ कौशल विकास, हरित विकास, शहरी नियोजन और तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा हुई, जिससे इस यात्रा का दायरा केवल निवेश जुटाने तक सीमित नहीं रहा।वहीं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की भूमिका मुख्यमंत्री सचिवालय और शासन के बीच रणनीतिक सेतु के रूप में देखी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाना, विभिन्न बैठकों के एजेंडे में समन्वय और यात्रा के दौरान सामने आए प्रस्तावों को आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया से जोड़ना ऐसे कार्य हैं जो सामान्यतः पर्दे के पीछे होते हैं और सुर्खियों में नहीं आते।यही वह बिंदु है जहां आज की पत्रकारिता पर भी सवाल उठता है। किसी भी सरकारी उपलब्धि की खबर में मुख्यमंत्री का नाम प्रमुखता से आना स्वाभाविक है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को पूरी तरह गायब कर देना खबर को अधूरा बना सकता है। मुख्यमंत्री निवेशकों के सामने राज्य का चेहरा होते हैं, लेकिन उस चेहरे के पीछे एक पूरी प्रशासनिक टीम काम करती है।सिंगापुर यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह केवल निवेश प्रस्तावों तक सीमित नहीं रही। Energy Capital Global की ओर से ₹41,750 करोड़ के AI-ready डेटा सेंटर कैंपस का प्रस्ताव सामने आया, Sunstream Green Energy की ओर से ₹1,500 करोड़ का प्रस्ताव और Valency International की ओर से ₹350 करोड़ के एग्रो-फूड प्रोसेसिंग एवं एक्सपोर्ट हब का प्रस्ताव सामने आया। इसके अलावा ITE Education Services के साथ तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण के लिए समझौता हुआ।अब असली परीक्षा सिंगापुर से लौटने के बाद शुरू होगी। निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना, MoU और Invitation to Invest को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना, समयबद्ध स्वीकृतियां देना, निवेशकों की समस्याओं का समाधान करना और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ना ही इस पूरी कवायद की सफलता तय करेगा।यहीं मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के सामने बड़ी जिम्मेदारी है। सिंगापुर में हुए संवाद को छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में परिणाम तक पहुंचाने की चुनौती अब उनके सामने होगी। यदि प्रस्तावित निवेश वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं तो इसका श्रेय केवल यात्रा की सफलता को नहीं, बल्कि उसके बाद की प्रशासनिक निगरानी और क्रियान्वयन क्षमता को भी देना होगा।इसलिए सिंगापुर यात्रा की कहानी केवल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विदेश यात्रा और निवेश घोषणाओं की कहानी नहीं है। यह राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक तंत्र के संयुक्त प्रयास की कहानी भी है। मुख्यमंत्री ने वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की संभावनाएं रखीं, लेकिन उन संभावनाओं को नीति, प्रक्रिया और परियोजनाओं में बदलने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।अब निगाह इस बात पर होनी चाहिए कि सिंगापुर से लौटे मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह इस निवेश अभियान को छत्तीसगढ़ की धरती पर कितनी तेजी से वास्तविकता में बदल पाते हैं। क्योंकि निवेश प्रस्ताव सुर्खियां बनाते हैं, लेकिन जमीन पर उतरी परियोजनाएं ही शासन की वास्तविक सफलता का प्रमाण बनती हैं।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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