छत्तीसगढ़

महादेव ऐप जांच में शिपिंग कंपनी का पूरा बैंक खाता फ्रीज करना गलत

हाईकोर्ट ने राहत दी

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 4 नवंबर। महादेव ऐप ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले की जांच के नाम पर विशाखापत्तनम की एक शिपिंग कंपनी का बैंक खाता लंबे समय तक फ्रीज रखना हाईकोर्ट ने अनुचित माना है। जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने पुलिस और निचली अदालतों के आदेश निरस्त करते हुए रायपुर के खमतराई थाने को आईसीआईसीआई बैंक में कंपनी का खाता तत्काल अनफ्रीज कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता साहिब खान और उनकी पत्नी सहर खान विशाखापत्तनम के निवासी हैं। दोनों मेसर्स इंडिगो शिपिंग सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर हैं। कंपनी का आईसीआईसीआई बैंक में चालू खाता है। खमतराई पुलिस द्वारा दर्ज धोखाधड़ी और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम से जुड़े मामले की जांच के दौरान इस खाते पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि न तो उनका नाम एफआईआर में आरोपी के रूप में है और न ही चार्जशीट में। मोहम्मद फरहान के साथ कारोबारी लेनदेन के आधार पर कंपनी का पूरा खाता फ्रीज कर दिया गया।

राज्य सरकार ने बताया कि मोहम्मद फरहान के मोबाइल की जांच में याचिकाकर्ताओं के खाते से जुड़े संदिग्ध लेनदेन मिले थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर पेश साइबर फॉरेंसिक रिपोर्ट में हालांकि महादेव या रेड्डी ऐप के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी में खाते के इस्तेमाल या उसमें मदद करने का कोई प्रमाण नहीं मिला।

रिपोर्ट में मोबाइल पर अलग-अलग बैंक खातों के बीच वित्तीय लेनदेन से जुड़ी व्हाट्सऐप चैट का उल्लेख था, लेकिन न तो संदिग्ध रकम का स्पष्ट ब्योरा था और न ही यह साबित हुआ कि पैसा अपराध से अर्जित किया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को बैंक खाता फ्रीज करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए खाते और कथित अपराध के बीच सीधा संबंध दिखाने वाला ठोस आधार होना चाहिए। केवल सामान्य आरोप या संदिग्ध लेनदेन बताकर किसी कारोबारी का पूरा खाता अनिश्चितकाल तक बंद नहीं रखा जा सकता।

जांच एजेंसी यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि खाते की कितनी रकम संदिग्ध थी और पूरे बैलेंस को फ्रीज करना क्यों जरूरी था। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी खाते में अपराध से जुड़ी कोई निश्चित रकम मिलती है तो जांच एजेंसी सक्षम मजिस्ट्रेट से कानून के मुताबिक उस रकम को सुरक्षित रखने का आदेश मांग सकती है।

इसी आधार पर कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के 3 सितंबर 2024 और दसवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के 26 अक्टूबर 2024 के आदेश निरस्त कर दिए।

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