रेलवे की जमीन के बदले नाती को भी मिल सकती है नौकरी

हाईकोर्ट ने केंद्र की याचिका खारिज की
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 4 नवंबर। रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले नौकरी देने की योजना में नाती को भी रोजगार का अवसर मिल सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन मालिक के परिवार के किसी सदस्य को पहले नौकरी नहीं मिली है तो नाती के दावे पर विचार किया जा सकता है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के कोसमंदा गांव का है। यहां महेश राम के नाम पर खसरा नंबर 487/5 में 0.004 हेक्टेयर जमीन दर्ज थी। वर्ष 2012-13 से 2018 के बीच रेलवे लाइन विस्तार के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसके बदले महेश राम की बेटी सावित्री बाई ने नौकरी की मांग की, लेकिन उम्र सीमा के आधार पर उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।
इसके बाद सावित्री बाई के बेटे सनत कुमार कश्यप ने अपने नाना की अधिग्रहित जमीन के बदले नौकरी मांगी। रेलवे ने 2 सितंबर 2011 की नीति का हवाला देते हुए कहा कि नाती को नौकरी देने का प्रावधान नहीं है। साथ ही एक जमीन के बदले एक से अधिक बार रोजगार नहीं दिया जा सकता।
सनत कुमार की याचिका पर कैट ने 31 जुलाई 2025 को यशवंत प्रकरण का हवाला देते हुए रेलवे को दावे पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था। रेलवे ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद राम मिरी ने दलील दी कि परिवार के किसी भी सदस्य को अब तक नौकरी नहीं मिली है। उन्होंने 21 जुलाई 2023 के कुमारी प्रमिला यादव प्रकरण का भी हवाला दिया, जिसमें कैट के आदेश को बरकरार रखा गया था।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कैट के आदेश को कायम रखा।



