छत्तीसगढ़

पेंड्रावन जलाशय के कैचमेंट में खनन का विरोध, एनओसी रद्द करने की मांग

किसानों का आरोप- डेम सेफ्टी बोर्ड की चेतावनी और विभागीय आपत्तियों को किया नजरअंदाज

रायपुर, 5 नवंबर। तिल्दा तहसील के ग्राम बंगोली स्थित 117 वर्ष पुराने पेंड्रावन जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी को 1722 एकड़ में लाइम स्टोन खनन की अनुमति दिए जाने का विरोध शुरू हो गया है। पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति ने एनओसी और पूरी खनन परियोजना निरस्त करने की मांग की है।

समिति के सदस्यों ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि जलाशय से 11 गांवों के 3440 किसानों की 2440 हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है। यह मछली पालन, निस्तारी और भूजल रिचार्ज का भी प्रमुख स्रोत है। खनन से जलाशय के अस्तित्व पर खतरा पैदा होगा और 40 से अधिक गांवों में जल संकट गहरा सकता है।

समिति ने बताया कि वर्ष 2017 में भी खनन के लिए एनओसी जारी हुई थी, जिसे किसानों के आंदोलन के बाद तत्कालीन जल संसाधन मंत्री ने निरस्त कर दिया था। कंपनी की याचिका पर हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2024 को निरस्तीकरण आदेश रद्द करते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी समिति से जलाशय पर खनन के प्रभावों की समीक्षा कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद पांच सदस्यीय समिति ने विरोध के बावजूद खनन के पक्ष में अनुशंसा कर दी।

समिति का आरोप है कि डेम सेफ्टी बोर्ड ने 4 मई 2025 की रिपोर्ट में आईआईटी रुड़की के अध्ययन पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया था कि खनन से जलाशय का अस्तित्व समाप्त होने का खतरा है। इसके बावजूद किसानों और तकनीकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर एनओसी जारी की गई।

समिति के अध्यक्ष अनिल नायक, सचिव घनश्याम वर्मा तथा संरक्षक देवजी पटेल, आलोक शुक्ला, उधोराम वर्मा और ललित बघेल ने शासन से एनओसी और पूरी खनन परियोजना तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

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