छत्तीसगढ़

नाबालिग रहते रेप और किडनैप, मगर कोर्ट ने परिपक्वता के आधार पर सुनाई दोषी को 20 साल की सजा

छत्तीसगढ़ संवाददाता

कोरबा, 6 नवंबर। नाबालिग लड़की का अपहरण कर करीब दस महीने तक अपने साथ रखने और बाद में उसे छोड़ देने के मामले में कोरबा की विशेष किशोर फास्ट ट्रैक अदालत ने 19 वर्षीय युवक को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपराध के समय आरोपी की उम्र 17 वर्ष थी। किशोर न्यायालय ने सामाजिक और बौद्धिक परिपक्वता के आकलन के बाद उसे बालिग की तरह मुकदमे का सामना करने योग्य माना था। अदालत ने निर्देश दिया है कि 21 वर्ष की उम्र पूरी होने तक उसे विशेष सुरक्षित गृह में रखा जाए। इसके बाद उसे नियमित जेल भेजा जाएगा।

विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार शहर की एक बस्ती में रहने वाला आरोपी 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। वह 23 अगस्त 2024 से 30 जून 2025 तक लड़की को अपने साथ रखे रहा। इसके बाद उसने लड़की से कहा कि अब वह उसे अपने साथ नहीं रखना चाहता और उसे छोड़ दिया।

लड़की घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) और 64(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।

शुरुआत में मामला किशोर न्यायालय में चल रहा था। सुनवाई के दौरान आरोपी की सामाजिक और बौद्धिक क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया गया। इसमें पाया गया कि अपराध के समय वह अपने कृत्य की गंभीरता और उसके परिणामों को समझने में सक्षम था।

इसी आधार पर किशोर न्यायालय ने उसे बालिग की तरह मुकदमे का सामना करने योग्य मानते हुए मामला सत्र न्यायालय को सौंप दिया। इसके बाद कोरबा की विशेष किशोर फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई हुई।

विशेष न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत ने पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87 और 65(1) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषसिद्धि करते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक के मुताबिक पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में न्यूनतम 20 साल के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने आरोपी की वर्तमान उम्र को देखते हुए उसे 21 वर्ष पूरा होने तक विशेष सुरक्षित गृह में रखने और उसके बाद नियमित जेल स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button