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दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन से पहले बीजेपी का पलटवार, संबित पात्रा ने राहुल गांधी से पूछे 10 सवाल

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसदों के मार्च व प्रदर्शन से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर पलटवार किया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने कहा कि पार्टी की मदद ज्ञानेश कुमार नहीं, गणेश जी कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर फॉर्म-6 और चुनाव आयोग को लेकर चार झूठ बोलने का आरोप लगाया और उनसे 10 सवाल पूछे।

प्रदर्शन का संदर्भ

इंडिया ब्लॉक के सांसद मंगलवार को संसद मार्ग से निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकालने वाले थे। विरोध का मुख्य मुद्दा SIR प्रक्रिया, फॉर्म-6 से जुड़ा विवाद और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। मार्ग पर भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। मार्च को आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर धरना दिया। राहुल गांधी ने कहा कि वे लोकतंत्र बचाने के लिए वहां खड़े हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त चुने हुए सांसदों से मिलने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का समय आ गया है।

संबित पात्रा का बयान

पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर अराजकता फैलाने और राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से फिर से आगे लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद फॉर्म-6 को लेकर जो बातें कही हैं, वे तथ्यों से मेल नहीं खातीं।

पात्रा के अनुसार, राहुल गांधी के चार मुख्य आरोप ये हैं कि फॉर्म-6 में अवैध बदलाव किया गया, बदलाव एकतरफा किया गया, चुनाव आयोग बीजेपी की मदद कर रहा है, और यह प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र पर आपराधिक हमला है। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग का रुख है कि फॉर्म-6 में संशोधन नहीं हुआ, बल्कि SIR के लिए एक घोषणा जोड़ी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार SIR से जुड़ा 24 जून 2025 का आदेश आयोग में सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ था।

ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल को लेकर पात्रा ने कहा कि वे 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त बने और 19 फरवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला। उनके अनुसार, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों को कुमार की मौजूदा भूमिका से जोड़ना सही नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “हमारी मदद ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी कर रहे हैं।”

राहुल गांधी से पूछे गए 10 सवाल

पात्रा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से ये सवाल पूछे:

  • क्या मृतक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाने चाहिए?
  • क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी “चुराए” वोटों से सांसद चुने गए? कुछ हिंदी रिपोर्टों में इस सवाल में सोनिया गांधी का नाम भी आया है।
  • अगर पहले 12 बार SIR हो चुका है, तो क्या उन कांग्रेस सरकारों और चुनाव आयोगों को भी अवैध माना जाए?
  • क्या तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की सरकारें भी “वोट चोरी” से बनी हैं? कुछ रिपोर्टों में कर्नाटक का नाम भी शामिल है।
  • विपक्ष के बूथ लेवल एजेंट खुद मतदाता सूची को लेकर शिकायत क्यों कर रहे हैं?
  • 1993 के बाद से मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति सरकार करती रही है। पहले इस व्यवस्था पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए?
  • क्या विपक्ष के जीतने पर चुनाव आयोग सही है और हारने पर लोकतंत्र को कमजोर करने वाला?
  • क्या चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर कांग्रेस अराजकता नहीं फैला रही?
  • क्या चुनाव आयोग के खिलाफ यह अभियान राहुल गांधी की राजनीतिक “रीलॉन्चिंग” की कोशिश है?
  • ईवीएम राजीव गांधी के समय लाई गई थीं। क्या कांग्रेस अब अपने पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ भी नारे लगाएगी?

फॉर्म-6 और अदालती स्थिति

फॉर्म-6 नए मतदाता के पंजीकरण से जुड़ा प्रपत्र है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी की मदद के लिए इसे अवैध और एकतरफा तरीके से बदला। बीजेपी और चुनाव आयोग इस बात से इनकार करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसने फॉर्म-6 में किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। बीजेपी का कहना है कि अदालत ने फॉर्म-6 को अवैध घोषित नहीं किया है।

विपक्ष SIR के दौरान नाम हटने, प्रक्रिया की पारदर्शिता और आयोग के अंदरूनी मतभेदों को लेकर सवाल उठा रहा है। बीजेपी इन आरोपों को संस्थाओं को बदनाम करने की मुहिम बता रही है और कह रही है कि मृतक व डुप्लीकेट नाम हटाना मतदाता सूची की नियमित प्रक्रिया है।

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