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फ्रांसीसी वायु सेना का ‘मिशन पेगासे 26’ भारत पहुंचा: 48 घंटे में दुनिया के किसी भी कोने में त्वरित तैनाती का अभूतपूर्व प्रदर्शन

नई दिल्ली/जोधपुर: फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना (French Air and Space Force) का बहुचर्चित ‘मिशन पेगासे’ (Mission Pégase 26) अपनी 40,000 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण वैश्विक यात्रा तय करते हुए भारत पहुंच चुका है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर फ्रांस की रणनीतिक हवाई शक्ति को प्रदर्शित करना और यह साबित करना है कि वह किसी भी आपात स्थिति में दुनिया के किसी भी हिस्से में महज 48 घंटे के भीतर एक बड़ा सैन्य बेड़ा तैनात कर सकता है।

महज 48 घंटे में दुनिया के किसी भी कोने में तैनाती

आधुनिक युद्ध और वैश्विक सुरक्षा के परिदृश्य में त्वरित प्रतिक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है। फ्रांसीसी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस बार के मिशन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास दुनिया के किसी भी कोने में 48 घंटे के भीतर पहुंचने और तुरंत सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की क्षमता है। गंतव्य पर पहुंचते ही विमानों में तेजी से ईंधन भरना, हथियार लोड करना और उन्हें किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार करना इस मिशन का मुख्य हिस्सा है।

मिशन पेगासे 26 की प्रमुख बातें:

  • विमानों का शक्तिशाली संयोजन: इस बेड़े में 4 उन्नत राफेल (Rafale F4) लड़ाकू विमान, हवा में ईंधन भरने वाले 3 A330 MRTT (मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट) फीनिक्स और 2 A400M एटलस ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हैं।
  • 40,000 किलोमीटर का सफर: आर्कटिक के ठंडे मौसम से शुरू हुआ यह मिशन जापान, इंडोनेशिया, भारत और मध्य पूर्व सहित कई देशों से होकर गुजर रहा है, जिसमें अलग-अलग तापमान और टाइम-जोन की चुनौतियों का सामना किया जा रहा है।
  • कमांड और कंट्रोल: मिशन का पूरा संचालन हवा में उड़ान भर रहे MRTT विमान और फ्रांस स्थित मुख्यालय से एक साथ किया जा रहा है।
  • भारत के साथ मजबूत साझेदारी: यह दल राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर पहुंचा है, जो भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती रणनीतिक और सैन्य साझेदारी का एक मजबूत संदेश है।

MRTT और राफेल विमानों का अचूक तालमेल

राफेल और A330 MRTT विमानों का कॉम्बिनेशन इस पूरे मिशन की सफलता की रीढ़ है। MRTT विमान हवा में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने का काम करते हैं, जिससे राफेल बिना रुके लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इसके साथ ही, एटलस विमान ग्राउंड सपोर्ट टीम, संचार उपकरण और अन्य जरूरी सामग्री ढोने का काम करते हैं। इस संयोजन ने फ्रांस को एक ऐसी वैश्विक ताकत बना दिया है जो बिना अपने घरेलू बेस पर निर्भर हुए लंबे समय तक किसी भी विदेशी बेस से अपना ऑपरेशन चला सकती है।
फ्रांस का यह मिशन न केवल उसकी तकनीकी और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, हवाई गश्त की स्वतंत्रता और भारत जैसे अहम सहयोगी देशों के साथ साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूती प्रदान करता है।

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