सीईसी के इस्तीफे की मांग पर रामदास अठावले का तंज, कहा- अभिजीत दीपके के दिमाग में ज्यादा हवा भर गई

मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयानों को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर तीखा हमला बोला है। अठावले ने कहा कि दीपके के दिमाग में ज्यादा हवा भर गई है और वे प्रधानमंत्री के बारे में उल्टी-सीधी बातें कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दीपके बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का अपमान कर रहे हैं।
अठावले ने कहा, “अभिजीत दीपके बोलता है कि प्रधानमंत्री की कितनी पढ़ाई हुई थी। उनको यह पूछने का क्या अधिकार है? यह बाबा साहेब का इसी तरह अपमान करता रहेगा तो जनता इनके खिलाफ आवाज उठाएगी।” उन्होंने कहा कि दीपके शिवाजी पार्क जाते हैं, लेकिन वहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित चैत्यभूमि नहीं जाते, जहां बाबा साहेब आंबेडकर की समाधि है।
सीजेपी पर इस्तीफा मांगने का आरोप
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी के पास इस्तीफा मांगने के अलावा कोई काम नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “उनको आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन अभिजीत दीपके बाबा साहेब का अपमान कर रहे हैं।” इससे पहले भी अठावले सीजेपी पर लगातार इस्तीफे की मांग करने का आरोप लगा चुके हैं और संगठन का नाम बदलकर “इस्तीफा जनता पार्टी” रखने की बात कह चुके हैं।
सीजेपी ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नामों के बाहर होने का आरोप लगाया था और प्रक्रिया रोकने तथा स्वतंत्र जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था कि यदि सीईसी इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से मुंबई के शिवाजी पार्क से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
एसआईआर और 13 करोड़ नामों का आंकड़ा
अठावले ने एसआईआर पर कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन अनावश्यक मुद्दे पर ताकत खर्च करना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के जरिए चली एसआईआर प्रक्रिया में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने की बहस चल रही है, लेकिन उनके पास जो आंकड़े हैं, उनके मुताबिक इनमें से कम से कम 2 करोड़ 8 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उनके नाम निकालना जरूरी था।
उन्होंने आगे कहा कि करीब 3 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके नाम सूची में थे, लेकिन वे वोटिंग के लिए नहीं जाते और इससे पहले भी उन्होंने मतदान नहीं किया। अठावले के अनुसार, इन्हीं कारणों से चुनाव आयोग को 6 करोड़ 3 लाख लोगों के नाम हटाने पड़े। उन्होंने कहा कि एसआईआर का मकसद पारदर्शी चुनाव कराना था।
चुनाव आयोग के आंकड़ों और समाचार रिपोर्टों के अनुसार, एसआईआर के ड्राफ्ट चरण में करीब 13.3 करोड़ नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि (एएसडीडी) श्रेणियों में रखे गए। इनमें करीब 2.7 से 2.8 करोड़ नाम मृत्यु के कारण, करीब 1 करोड़ दोहरी प्रविष्टि के कारण और करीब 9.5 करोड़ नाम अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित या अन्य कारणों से चिह्नित बताए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 13 करोड़ का आंकड़ा ड्राफ्ट चरण की श्रेणी है, अंतिम सूची से सभी नामों के हटने का नहीं। योग्य मतदाता दावे और आपत्ति दर्ज कराकर नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं।
अठावले का 2 करोड़ 8 लाख मृत्यु का आंकड़ा आयोग द्वारा बताए गए करीब 2.7-2.8 करोड़ के आंकड़े के निकट है, जबकि उनके 3 करोड़ “लापता” और कुल 6 करोड़ 3 लाख हटाने के दावे आयोग की पूरी एएसडीडी श्रेणी से मेल नहीं खाते। आयोग के अनुसार, स्थानांतरित मतदाताओं की संख्या अकेले करीब 6.3 करोड़ बताई गई है।
इस्तीफे की मांग पर अठावले का रुख
अठावले पहले भी कह चुके हैं कि मतदाता सूची को लेकर स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। उन्होंने दीपके को सक्रिय बताया था, लेकिन सीईसी के इस्तीफे की मांग को उचित नहीं माना था। सीजेपी का कहना है कि एसआईआर के तहत नामों को बाहर करने की प्रक्रिया से मतदान के अधिकार पर असर पड़ा है और वह अपनी मांगों पर अड़ी रहेगी।



