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कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने हिसार, बरवाला और उकलाना अनाज मंडियों का निरीक्षण किया

हिसार। लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने मंगलवार को हिसार, बरवाला और उकलाना की अनाज मंडियों का दौरा कर फसल खरीद, उठान और किसानों के लिए की गई व्यवस्थाओं का मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को केवल कागजों पर समीक्षा न कर मंडियों में जाकर जमीनी स्तर पर निगरानी करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने मंडियों में पहुंचकर खरीद प्रक्रिया की जानकारी ली और किसानों व आढ़तियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं जानी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मंडियों में व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रखी जाएं और किसानों को किसी भी स्तर पर परेशानी न हो।

समय पर खरीद और उठान सुनिश्चित करने के निर्देश

रणबीर गंगवा ने कहा कि किसानों की फसल की खरीद प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए और खरीदी गई फसल का उठान बिना देरी के हो। मंडी में फसल लेकर आने वाले किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने खरीद एजेंसियों, मार्केट कमेटी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा।

मंत्री ने बारदाने की उपलब्धता और फसल खरीद की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उठान, साफ-सफाई, पेयजल, बिजली, शौचालय और किसानों के बैठने की व्यवस्था की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। किसी व्यवस्था में कमी आने पर तत्काल समाधान करने को कहा गया।

किसानों की शिकायतों का प्राथमिकता से निपटारा

कैबिनेट मंत्री ने मंडियों में मौजूद किसानों और आढ़तियों से खरीद व्यवस्था का फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले और उपज बेचने में कोई दिक्कत न हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को सरकार की योजनाओं और सुविधाओं की पूरी जानकारी दी जाए, ताकि पात्र किसानों को समय पर लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि अन्नदाता की सुविधा, सम्मान और हित सरकार की प्राथमिकता हैं। खरीद सीजन के दौरान मंडियों में व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए और किसानों की शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री अनूप धानक, हिसार एसडीएम ज्योति मित्तल, बरवाला एसडीएम अश्वीर नैन, हिसार मार्केट कमेटी के चेयरमैन रविंद्र रॉकी सहित अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी प्रतिनिधि और किसान मौजूद रहे।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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