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जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी, 3 से 4 हजार लोगों के जुटने का अनुमान

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस सभा में करीब 3 से 4 हजार लोग शामिल हो सकते हैं। इसी आशंका के मद्देनजर नई दिल्ली जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

पुलिस ने साफ किया है कि जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के अनधिकृत धरने, विरोध प्रदर्शन या मार्च की इजाजत नहीं दी गई है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। यह आदेश 23 अगस्त से 21 अक्टूबर तक प्रभावी बताया गया है। इसके तहत पूर्व लिखित अनुमति के बिना पांच या अधिक लोगों का सार्वजनिक जमावड़ा, सभा, जुलूस, प्रदर्शन, नारेबाजी और बैनर-तख्तियां ले जाना प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इस प्रदर्शन का आह्वान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), राज्यसभा सदस्य मनोज झा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने किया था। सभा सुबह 11 बजे शुरू होना प्रस्तावित थी। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। आयोजक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आरोप लगा रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर आंदोलन की बात कही थी। मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में उसके प्रस्तावित प्रदर्शन को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद पार्टी ने मुंबई में जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया। दिल्ली में जंतर-मंतर पर आज के प्रदर्शन को लेकर पुलिस का कहना है कि किसी संगठन को अनुमति नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर अलग-अलग लोगों की ओर से जुड़ने की अपील जारी है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि अनुमानित भीड़ को देखते हुए जंतर-मंतर और नई दिल्ली के संवेदनशील स्थानों पर दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान तैनात किए गए हैं। आवाजाही नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड लगाए गए हैं और प्रवेश-निकास पर अतिरिक्त बल रखा गया है। डीसीपी सचिन शर्मा ने लोगों से कानून का पालन करने और पुलिस का सहयोग करने की अपील की है।

जंतर-मंतर दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल है, लेकिन यहां भी पूर्व लिखित अनुमति जरूरी होती है। अनुमति मिलने पर भी कार्यक्रम आमतौर पर तय समय और शर्तों तक सीमित रहता है। फिलहाल पुलिस का रुख साफ है कि बिना इजाजत किसी सभा की अनुमति नहीं है।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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