ओबीसी आरक्षण और जाति जनगणना में अलग कॉलम की मांग, मूल निवासी संघ ने दिया धरना।
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने, जाति जनगणना के प्रपत्र में ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मूल निवासी संघ भारत, छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में शनिवार, 10 अक्टूबर को रायपुर के राजीव गांधी चौक पर प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया गया। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और मूल निवासी समाज के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद तीन प्रमुख मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।मूल निवासी संघ भारत के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बिलासपुर प्रभारी श्याम मूरत कौशिक, बिलासपुर जिलाध्यक्ष डॉ. रघु साहू, महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा ध्रुव, प्रदेश सचिव रानी हेला और जिला अध्यक्ष मधु सोनी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित विधेयक पिछले पौने चार साल से राज्यपाल के हस्ताक्षर के इंतजार में लंबित है। संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना के लिए निर्धारित प्रपत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह ओबीसी के लिए अलग कॉलम की व्यवस्था नहीं की गई है। इसी के विरोध में आरक्षण विधेयक को मंजूरी देने और जाति जनगणना के प्रपत्र में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर धरना आयोजित किया गया।ओबीसी के अधिकारों के लिए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनीधरना-प्रदर्शन के मुख्य अतिथि और मूल निवासी संघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट पंकज रवि ने कहा कि संगठन ने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए राजधानी रायपुर में धरना दिया है। यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आगामी दिनों में दिल्ली में देशव्यापी स्तर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।मुख्य वक्ता और ओबीसी संगम प्रमुख सीए विष्णु बघेल ने कहा कि आजादी के बाद से विभिन्न सरकारों ने ओबीसी समाज को उसके हक और अधिकार नहीं दिए हैं। अधिकारों की प्राप्ति के लिए समाज को संगठित होकर संघर्ष करना होगा।मूल निवासी संघ भारत छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं ओबीसी संगम के प्रमुख ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओबीसी पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ओबीसी प्रधानमंत्री होने के बावजूद समाज को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए ओबीसी आरक्षण की लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया।बिहार के पटना से पहुंचे सोशल जस्टिस मूवमेंट के एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर ने कहा कि समाज को कर्पूरी ठाकुर के विचारों के अनुरूप अधिकार, सम्मान, आरक्षण और स्वाभिमान चाहिए। इसके लिए एकजुट होकर संघर्ष करना आवश्यक है।ओबीसी फेडरेशन ऑफ इंडिया, बेंगलुरु के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एंजेरप्पा ने कहा कि ओबीसी समाज को अपनी मांगों के लिए एकजुट होकर आगे आना होगा। उन्होंने आगामी महीनों में कन्याकुमारी से दक्षिण भारत के राज्यों होते हुए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के रास्ते दिल्ली तक ओबीसी एकता रैली निकालने की योजना की जानकारी दी।धरना-प्रदर्शन के समापन पर मूल निवासी संघ भारत, छत्तीसगढ़ की ओर से प्रशासन के प्रतिनिधि एसडीएम को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी गईं।पहली मांग जाति जनगणना के प्रपत्र में ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़ने की है। दूसरी मांग छत्तीसगढ़ में लंबित ओबीसी आरक्षण विधेयक को मंजूरी देने की है। तीसरी मांग एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने की है।प्रदेशभर के पदाधिकारियों ने किया संबोधितकार्यक्रम का संचालन मूल निवासी संघ भारत छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट अमरजीत पटेल ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा ध्रुव ने किया।धरना-प्रदर्शन को प्रदेश उपाध्यक्ष जोश थॉमस, रेनू महानंद, कामरेड सौरा यादव, किसान नेता तेजकुमार विद्रोही, प्रवीण श्योकंद, महासचिव साजी जॉन, बिलासपुर जिला अध्यक्ष डॉ. रघु साहू, दुर्ग जिला अध्यक्ष जय साहू, कबीरधाम जिला अध्यक्ष डॉ. जे. अजित और सामाजिक कार्यकर्ता रामलाल गुप्ता सहित संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों ने संबोधित किया।प्रदर्शन में मूल निवासी संघ भारत के बिलासपुर जिला महिला अध्यक्ष मधु सोनी, शहर अध्यक्ष देवकुमार सोनी, उपाध्यक्ष अनीता कश्यप, संगठन सचिव भोला साहू, किरण कुर्रे, सरिता चौहान, अजय राय, पूर्णिमा विश्वकर्मा, अंबिका कौशिक, राजेंद्र कौशिक, डॉ. आशिया दीन और शौर्य कौशिक सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे कार्यकर्ता शामिल हुए।

